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4 साल बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव का बड़ा बयान, “अफसरों से पटरी बैठाना मेरा काम नहीं”

इंदौर। पुष्यमित्र भार्गव और उनकी निगम परिषद का कार्यकाल चार साल का हो गया है। अब अंतिम एक साल बाकी है। इसी उपलक्ष्य में उन्होंने मंगलवार को अपने कामों का लेखा-जोखा पेश किया। अपने अहम काम गिनाए और चार साल में पांच निगमायुक्तों पर भी बात की।

पुष्यमित्र भार्गव का महापौर पद पर चार साल पूरे हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने और निगम ने क्या काम किए और क्या कमी रह गई, इस पर मंगलवार को मीडिया से चर्चा की। इसमें कई मुद्दों पर बात की। कभी पर कहा कि बाणगंगा की घटना दुखद थी लेकिन इससे काफी कुछ सीखने को मिला और पूरे स्टेट के लिए सीख है कि समस्या को ज्यादा नहीं बढ़ा सकें। लेकिन हुकुमचंद मिल का 32 साल पुराना मामला निपटा, जादू के लिए देश का पहला ग्रीन बॉन्ड जारी होना, नर्मदा के चौथे चरण के 2800 करोड़ के कार्य को अहम बताया।

क्या बोले पांच निगमायुक्त और ब्यूरोक्रेसी पर : महापौर

भार्गव ने उनके चार साल के कार्यकाल में पांच निगमायुक्त होने और अधिकारियों से पटरी नहीं बैठने पर खुलकर बात रखी। महापौर ने कहा कि मेरा काम अधिकारियों से पटरी बैठाना नहीं था। मेरा काम था कि शहर के लिए बेहतर हो, वह करना, उसके लिए नीति तय करना, आगे बढ़ना और उसका पालन मैदान में अधिकारियों को करना है।

राजनीतिक अनुभव पर बोले- मैं अब थोड़ा शातिर हो गया हूं। वहीं भार्गव जब महापौर बने तब राजनीति में उनका पहला कदम था। ऐसे में राजनीतिक अनुभव नहीं होने, राजनीति नहीं आने और शातिरबाजी को लेकर सवाल उठा। इस पर उन्होंने कहा कि मैंने जैसा हूं, वैसे ही रहकर काम करने की कोशिश की है। रही शातिरबाजी की बात तो मैं अब थोड़ा शातिर तो हो गया हूं।

इंदौर को भारत सरकार के डिजीपिन प्लेटफॉर्म से जुड़ने वाला देश का पहला शहर बनाया गया। क्यूआर आधारित डिजिटल पता व्यवस्था लागू की गई।

महापौर ने रिपोर्ट कार्ड में यह बताया

  • महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अंतर्राष्ट्रीय इंदौर का नाम लेते हुए कहा कि चार साल में भविष्य के इंदौर पर काम किया गया है। साल 2047 के इंदौर के लिए पानी, सीवरेज, डिजिटल इंदौर और ग्रीन इंदौर कॉन्सेप्ट अहम रहा।
  • देश का पहला म्युनिसिपल ग्रीन बॉन्ड : इस राशि से जेटपुरा क्षेत्र में 60 मेगावाट क्षमता का सोलर पार्क विकसित किया गया। इससे हर माह ग्रीन बॉन्ड बढ़ रहा है।
  • भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ₹2,156.16 करोड़ की लागत से चार मेगा जल प्रदाय परियोजनाओं का कार्य शुरू।
  • चार सालों में 122.09 करोड़ की लागत से सात प्रमुख सीवरेज परियोजनाएं पूर्ण हुईं तथा 30.65 किलोमीटर नई सीवर लाइन बिछाई गई।
  • शहर की 24 मास्टर प्लान सड़कों पर काम। शहर में 23 फ्लाईओवर का काम चल रहा है।

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