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सुरत निराकरण:कलेक्टर के निर्देश, अफसर की फाइलों में कैद

जनसुनवाई में कलेक्टर सुन रहे फरियाद, अफसर फाइलों में दबा रहे शिकायतें

इंदौर। जनता की शिकायतें सुनने कलेक्टर हर मंगलवार घंटों जनसुनवाई में बैठते हैं। मौके पर अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश भी देते हैं, लेकिन उनके मातहत अफसर कलेक्टर के आदेशों को ही ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि जनसुनवाई में शिकायतों का अंबार बढ़ रहा है और निराकरण की रफ्तार सुस्त है।

कलेक्टर शिवम वर्मा के कार्यकाल में 12,227 शिकायतें पहुंचीं, लेकिन इनमें से 8,832 पर अब तक जवाब तक दर्ज नहीं हुआ। सिर्फ 2,978 मामलों में जवाब दर्ज पाया गया। हर मंगलवार करीब 350 शिकायतें पहुंच रही हैं और 30 से ज्यादा अधिकारी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं, फिर भी फरियादियों को समाधान के लिए बार-बार कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। आंकड़े तो अफसरों की कार्यशैली की पोल खोल रहे हैं।

एसडीएम सांवेर की 564 शिकायतों में एक भी जवाब दर्ज नहीं हुआ। नगर निगम की 1,732 में से 1,293 शिकायतें लंबित हैं। पुलिस में एडीसीपी जोन-4 की 479, जोन-3 की 380 और ग्रामीण एसपी की 336 शिकायतों पर शून्य कार्रवाई दर्ज है। 17 विभाग ऐसे हैं, जिन्होंने एक भी शिकायत का जवाब देना जरूरी नहीं समझा।

अधिकारी भले ही लंबित शिकायतों के पीछे तकनीकी कारण और शासन स्तर पर लंबित मामलों का हवाला दें, लेकिन सवाल यह है कि कलेक्टर के निर्देशों के बाद भी यदि शिकायतों पर जवाब तक दर्ज नहीं हो रहा, तो फिर जिम्मेदारी किसकी है?

कलेक्टर जनता के बीच बैठकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन मातहत अफसर उनकी मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। अब जरूरत जनसुनवाई की नहीं, बल्कि उन अफसरों की जवाबदेही तय करने की है, जो शिकायतों को फाइलों में दफन कर रहे हैं।

जनसुनवाई में कलेक्टर कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश देते हैं। फरियादियों को भी भरोसा रहता है कि अब उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन इसके बाद कई शिकायतें विभागीय स्तर पर पहुंचकर फाइलों में दब जाती हैं। नतीजा यह कि अगली जनसुनवाई में फिर वही फरियादी अपनी पुरानी शिकायत लेकर पहुंच जाता है। यह स्थिति सीधे तौर पर बताती है कि समस्या जनसुनवाई नहीं, बल्कि उसके बाद बनने वाली कार्यप्रणाली में है। कलेक्टर जनता के बीच बैठकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन कई मातहत अधिकारी उनके निर्देशों को अमलीजामा पहनाने में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।

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