नियुक्तियों पर लगता जा रहा ब्रेक
इंदौर। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में इन दिनों राजनीति पूरी तरह “होल्ड” मोड में नजर आ रही है। नगर निगम के एल्डरमैन की नियुक्ति हो, इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की नई टीम का गठन, विभिन्न सरकारी समितियों में राजनीतिक नियुक्तियां या फिर भाजपा के युवा मोर्चा और महिला मोर्चा की जिला कार्यकारिणी—हर जगह इंतजार का माहौल है।
प्रदेश संगठन में बदलाव के बाद उम्मीद थी कि इंदौर में भी राजनीतिक नियुक्तियों को अंतिम रूप मिल जाएगा, लेकिन अभी तक कोई बड़ा फैसला सामने नहीं आया। इससे लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ रही है। कई नेता महीनों से जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन हर बार जवाब मिलता है—”अभी मामला होल्ड पर है।”
नगर निगम में एल्डरमैन नियुक्ति इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसके बाद कई समितियों के गठन का रास्ता साफ होगा। दूसरी ओर आईडीए में भी नई नियुक्तियों का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। यही स्थिति विभिन्न निगम-मंडलों और सरकारी समितियों की है, जहां राजनीतिक नियुक्तियां अभी तक अधर में लटकी हुई हैं।
विकास योजनाओं पर भी ‘ऊपरी मंजूरी’ का इंतजार
कई विकास योजनाओं की रफ्तार भी उम्मीद से धीमी बनी हुई है। कुछ परियोजनाओं में तकनीकी और वित्तीय कारणों से देरी हो रही है, जबकि कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव अभी भी उच्च स्तर की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। हाल ही में इंदौर विकास प्राधिकरण की एक बड़ी कन्वेंशन सेंटर परियोजना भी फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी।
टेंडर प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संगठन और सरकार के बीच समन्वय बनने तक कई अहम फैसलों को रोका गया है। अधिकारी भी बड़े निर्णय लेने से बच रहे हैं और अधिकांश फाइलें “ऊपर से निर्देश” का इंतजार कर रही हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इंदौर से जुड़े अधिकांश निर्णय फिलहाल प्रदेश नेतृत्व के स्तर पर रोककर रखे गए हैं। वजह चाहे संगठनात्मक संतुलन हो, स्थानीय गुटबाजी हो या बड़े राजनीतिक समीकरण, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर उन कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा है, जो लंबे समय से जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।





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