भोपाल। पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लेने की कार्रवाई को भाजपा संगठन और सरकार एक स्पष्ट संदेश के रूप में देख रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिन शिकायतों के आधार पर लखन पटेल से विभाग वापस लिया गया, उसी प्रकार की शिकायतें चार अन्य मंत्रियों के खिलाफ भी मुख्यमंत्री कार्यालय और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुकी हैं। इन शिकायतों की जांच संगठन अपने स्तर पर कर रहा है। यदि रिपोर्ट प्रतिकूल आती है तो आने वाले दिनों में कुछ और चौंकाने वाले फैसले सामने आ सकते हैं।
तीन से चार मंत्रियों की हो सकती है विदाई
भाजपा संगठन से जुड़े सूत्रों का दावा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ तीन से चार मंत्रियों की विदाई लगभग तय मानी जा रही है। इनमें ऐसे मंत्री शामिल बताए जा रहे हैं जिनके विवादित बयानों या कार्यशैली के कारण सरकार और संगठन को कई बार असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। इसके अलावा कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदलने की भी चर्चा है। माना जा रहा है कि प्रभावशाली विभागों की जिम्मेदारी नए चेहरों को देकर कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को अपेक्षाकृत हल्के विभाग सौंपे जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री के पास अब भी कई अहम विभाग
वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में 30 मंत्री हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार अभी चार और विधायक मंत्रिमंडल में शामिल किए जा सकते हैं। रामनिवास रावत के चुनाव हारने और मंत्रिमंडल से बाहर होने के बाद वन एवं पर्यावरण विभाग मुख्यमंत्री के पास है। अब पशुपालन एवं डेयरी विभाग भी उनके पास आ गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के पास लगभग एक दर्जन विभागों की जिम्मेदारी बताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ मुख्यमंत्री की व्यस्तता और बढ़ेगी। ऐसे में वे अपने पास मौजूद कुछ महत्वपूर्ण विभाग नए मंत्रियों को सौंप सकते हैं।
24 जुलाई को विधानसभा का मानसून सत्र समाप्त होगा, जबकि 3 अगस्त को दतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम घोषित होना है। भाजपा नेतृत्व नहीं चाहता कि उपचुनाव के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार से कोई राजनीतिक संदेश या असंतोष का माहौल बने।

छह नए चेहरों को मिल सकता है मौका
मुख्यमंत्री इस विस्तार के जरिए विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। संभावना है कि नए मंत्रियों के चयन में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय प्रतिनिधित्व, युवा और अनुभवी चेहरों का मिश्रण तथा संगठन के प्रति सक्रियता को प्राथमिकता दी जाएगी। आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीतिक जरूरतों को देखते हुए नए चेहरों में आदिवासी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला वर्ग के प्रतिनिधित्व पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
दिल्ली की सहमति के बाद होगा अंतिम फैसला
भाजपा में मंत्रिमंडल विस्तार का अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से होता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पहले ही सार्वजनिक रूप से संकेत दे चुके हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार होगा, हालांकि उन्होंने समय-सीमा स्पष्ट नहीं की थी। अब राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि दतिया उपचुनाव के बाद सरकार का नया स्वरूप सामने आ सकता है। इस फेरबदल का उद्देश्य केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं होगा, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक और सामाजिक समीकरणों को भी मजबूत करना होगा।




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