इंदौर। बीजेपी के राऊ से पूर्व विधायक जीतू जिराती के करीबी नेता और पूर्व पार्षद पति निलेश चौधरी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। निलेश चौधरी व उनके परिवार की हातोद स्थित 17 हेक्टेयर की सीलिंग जमीन पर विकास मंजूरी हो गई है।
इंदौर कलेक्टर की कॉलोनी सेल में बीजेपी नेता ने बड़ा खेल कर दिया है। राऊ के पूर्व विधायक जीतू जिराती के करीबी नेता और पूर्व पार्षद पति निलेश चौधरी व उनके परिवार ने हातोद के सोनगीर गांव में स्वास्तिक ग्रांड नाम से कॉलोनी का प्रोजेक्ट शुरू किया था। इस प्रोजेक्ट को 8 जनवरी 2025 को विकास मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद जून 2025 में रेरा की मंजूरी भी मिल गई। लेकिन दूसरे बिल्डर मेहुल पिता नवीन मेहता ने इस प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए और जांच की मांग की।
जांच में सामने आया कि जिस जमीन पर कॉलोनी विकसित की जा रही थी, वह सीलिंग जमीन है। इसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। हातोद के सोनगीर गांव की करीब 17 हेक्टेयर जमीन के लिए कॉलोनी की विकास मंजूरी का आवेदन लगाया गया था। इसमें कई सर्वे नंबरों की जमीन शामिल थी। यह जमीन निलेश चौधरी के पिता बद्रीलाल चौधरी, उनके भाई दिनेश और सुनील के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज थी।
इस प्रोजेक्ट में शरद गुसाईं पिता रामजीलाल गुसाईं को डेवलपर बनाया गया। मंजूरी लेने के दौरान साल 2009-10 का एक आदेश लगाया गया, जिसमें दावा किया गया कि यह जमीन सीलिंग से मुक्त होकर निजी रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी है।
सीलिंग की जमीन का पता कैसे चला
इसी जमीन के पास मेहुल पिता नवीन मेहता का भी प्रोजेक्ट आना है, जो मेसर्स लुमिनियस इंफ्राप्रोजेक्ट के नाम से है। जब मेहता विकास मंजूरी लेने पहुंचे तो उन्होंने भी जमीन के दस्तावेज जमा किए और बताया कि जमीन सीलिंग मुक्त हो चुकी है। इस पर कॉलोनी सेल ने सीलिंग मुक्त होने का आदेश मांगा। मेहता ने भी वही आदेश नंबर बताया, जिसका जिक्र निलेश चौधरी और अन्य लोगों ने स्वास्तिक ग्रांड प्रोजेक्ट में किया था।
लेकिन जब उस आदेश की कॉपी मांगी गई तो वह उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद मेहता ने सवाल उठाया कि जब इसी आदेश के आधार पर स्वास्तिक ग्रांड को मंजूरी दी गई है, तो उन्हें भी उसी आधार पर मंजूरी दी जाए। इसके बाद कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर फाइल दोबारा खोली गई और पूरे मामले की जांच शुरू की गई।





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