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भाजपा कार्यसमिति में फिर वीआईपी एंट्री! पूर्व कांग्रेसीयों को बड़ी जिम्मेदारी

भोपाल। भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति में 17 मंत्रियों और पूर्व कांग्रेस नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिलीं। इससे जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और संगठनात्मक संतुलन पर सवाल उठे हैं। करीब 11 महीने के इंतजार के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मध्य प्रदेश बीजेपी की नई प्रदेश कार्यसमिति घोषित कर दी है। लेकिन सूची सामने आते ही संगठन के भीतर एक पुरानी बहस फिर तेज हो गई है।

सवाल यह उठ रहा है कि क्या भाजपा में वर्षों से मेहनत करने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की तुलना में प्रभावशाली नेताओं और दल बदलकर आए चेहरों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है? नई कार्यसमिति में प्रदेश सरकार के 17 मंत्रियों को जगह दी गई है। वहीं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए कई नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इससे संगठन के भीतर कार्यकर्ता बनाम प्रभावशाली नेताओं को चर्चा तेज हो गई है।

पूर्व कांग्रेसीयों को मिली बड़ी जगह

नई कार्यसमिति की सबसे चर्चित बात कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले नेताओं की मजबूत मौजूदगी रही। कभी भाजपा के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरने वाले और भाजपा की नीतियों के मुखर आलोचक रहे कई नेता अब संगठन की सबसे प्रभावशाली इकाई का हिस्सा बन गए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे सुरेश पचौरी को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। वहीं छिंदवाड़ा के वरिष्ठ नेता और कमलनाथ के करीबी माने जाने वाले दीपक सक्सेना को भी यही जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इन नेताओं को मिला स्थान

प्रदेश कार्यसमिति में कांग्रेस से भाजपा में आए कई प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी, दीपक सक्सेना, अरविंद भदौरिया सिंह, तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, एदल सिंह कंसाना, उदय प्रताप सिंह, रक्षा सिरोनिया, गिरिजा दंडोतिया, ओपीएस भदौरिया, इमरती देवी और महेंद्र सिंह सिसोदिया जैसे नाम प्रमुख हैं।

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