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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज: राजनीति के साथ बनी कानूनी जंग, सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस

भोपाल/इंदौर संकेत प्रतिनिधि।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने का मामला अब केवल एक तकनीकी या कानूनी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसने प्रदेश की राजनीति में बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। नामांकन रद्द होने के बाद जहां भाजपा इसे अपनी राजनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करने वाला मामला बता रही है। राज्यसभा चुनाव के इस घटनाक्रम ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव को और तीखा कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मामला आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

भाजपा नेताओं ने मनाया जश्न

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के तुरंत बाद विधानसभा परिसर में भाजपा नेताओं और मंत्रियों के बीच उत्साह का माहौल दिखाई दिया। प्रदेश सरकार के मंत्री राकेश सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय सहित कई नेताओं ने इसे भाजपा की बड़ी जीत बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस घटनाक्रम को केवल कानूनी प्रक्रिया का परिणाम नहीं, बल्कि कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी और रणनीतिक विफलता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। भाजपा नेताओं की सार्वजनिक प्रतिक्रिया ने इस विवाद को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।

चुनाव आयोग की चुप्पी से बढ़ी कांग्रेस की चिंता

दूसरी ओर कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग के निर्णय और उसकी चुप्पी पर सवाल उठा रही है। पार्टी का कहना है कि नामांकन रद्द करने के पीछे की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों की राय लेने के बाद ही कोई निर्णय करेगा। हालांकि आयोग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यही कारण है कि कांग्रेस के भीतर बेचैनी बढ़ती जा रही है।

आधी रात को सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस

मामले को लेकर कांग्रेस ने कानूनी लड़ाई भी तेज कर दी है। पार्टी ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। जानकारी के अनुसार यह याचिका बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात करीब 1 बजकर 48 मिनट पर डिजिटल माध्यम से दाखिल की गई। अब सभी की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय पर टिकी हुई हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि याचिका पर सुनवाई कब होगी।

आज दोपहर 3 बजे तक की समय-सीमा अहम

राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से गुरुवार दोपहर 3 बजे तक का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल, राज्यसभा चुनाव के लिए नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा यही है। यदि इस अवधि के भीतर चुनाव आयोग कांग्रेस के पक्ष में कोई निर्णय नहीं लेता या सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलती, तो भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है। इसके साथ ही भाजपा के अन्य उम्मीदवार तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल भी निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा हो जाएगा और कांग्रेस को बिना मुकाबले बड़ा राजनीतिक झटका लगेगा।

राष्ट्रपति से मुलाकात करेगी कांग्रेस

मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी भी कांग्रेस ने कर ली है। पार्टी के वरिष्ठ नेता आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी देंगे और हस्तक्षेप की मांग करेंगे। इसके अलावा दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में भी वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होगी।

विपक्ष के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना मामला

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद अब केवल एक राज्यसभा सीट तक सीमित नहीं है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और विपक्ष की राजनीतिक भागीदारी से जोड़कर देख रही है, जबकि भाजपा इसे नियमों के पालन और कानूनी प्रक्रिया की जीत बता रही है। आने वाले कुछ घंटे इस पूरे मामले की दिशा और मध्य प्रदेश की राज्यसभा राजनीति का भविष्य तय कर सकते हैं। यदि कांग्रेस को न्यायिक या चुनाव आयोग स्तर पर राहत नहीं मिलती है, तो यह विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित होगा, वहीं भाजपा के लिए इसे एक महत्वपूर्ण रणनीतिक जीत माना जाएगा।

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