Home ताज़ा ख़बर राजवाड़ा में सामाजिक कार्यक्रम की आड़ में हुआ खाना- सुरक्षा और अनुमति पर उठे सवाल, महापौर ने कार्रवाई की बात कही
ताज़ा ख़बरनगर निगम इन्दौर

राजवाड़ा में सामाजिक कार्यक्रम की आड़ में हुआ खाना- सुरक्षा और अनुमति पर उठे सवाल, महापौर ने कार्रवाई की बात कही

नाराज नेता प्रतिपक्ष ने महापौर को बताया शहर केभी लिए आफत

इंदौर की ऐतिहासिक धरोहर राजवाड़ा एक बार फिर विवादों में है। सामाजिक कार्यक्रम की आड़ में दरबार हॉल में डिनर आयोजन किए जाने से सुरक्षा मानकों और अनुमति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

– दरअसल एक जैन सोशल ग्रुप एलीगेंट ने पपेट शो की अनुमति ली थी, लेकिन अनुमति के दायरे से बाहर जाकर दरबार हॉल में भोजन परोसा गया। आयोजन के लिए राजवाड़ा परिसर में गैस सिलेंडर भी लाए गए, जबकि ऐतिहासिक इमारत में खाना बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। गौरतलब है कि राजवाड़ा का हाल ही में 26 करोड़ रुपए की लागत से रिनोवेशन किया गया था। ऐसे में इस तरह की गतिविधियों को लेकर पुरातत्व संरक्षण और सुरक्षा पर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि आयोजन के लिए पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने अनुमति दी थी। वही इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि यह पूरा मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बिना वैध अनुमति के राजवाड़ा परिसर में कार्यक्रम और खाना बनाने की मंजूरी दी गई है, तो संबंधित विभाग पर उचित कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

बाइट – पुष्यमित्र भार्गव — महापौर

– वहीं इंदौर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने इस पूरे घटनाक्रम पर महापौर को घेरते हुए कहा कि पुष्यमित्र भार्गव के कार्यकाल में शहर में किसी भी क्षेत्र में काम नहीं हो रहा है। चौकसे ने आरोप लगाया कि महापौर बनने के बाद शहर में एक आफत आ गई है। उन्होंने राजवाड़ा में हुए आयोजन की कड़ी निंदा करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित अधिकारियों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।

बाइट – चिंटू चौकसे — नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम

वी ओ – गौरतलब है कि राजवाड़ा जैसे संवेदनशील और ऐतिहासिक स्थल पर कार्यक्रम के नाम पर नियमों से छेड़छाड़ किए जाने से नागरिकों और इतिहास प्रेमियों में नाराज़गी है। कई लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे आयोजनों पर सख्त नियंत्रण रखना चाहिए, ताकि धरोहरों को नुकसान न पहुँचे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Our Visitor

023491
Total Users : 23491

Related Articles