बिल्डरों और कॉलोनाइजरों को झटका, नए नियम से बढ़ेगा निगम का राजस्व
इंदौर। नगर निगम ने शहर के कॉलोनाइजरों और बिल्डरों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए विकसित कॉलोनियों के भूखंडों पर बनने वाले नए निर्माण पर भी आश्रय एवं विकास शुल्क अनिवार्य कर दिया है। निगमायुक्त हितेशी सिंघल के निर्देश पर जारी आदेश के अनुसार अब पूर्व विकसित कॉलोनियों के प्लॉटों पर बनने वाले अपार्टमेंट, फ्लैट, ग्रुप हाउसिंग और बहु-इकाई भवनों के लिए कॉलोनी विकास की अनुमति लेना और निर्धारित शुल्क जमा करना जरूरी होगा।
नगर निगम का कहना है कि इस व्यवस्था से निगम के राजस्व में वृद्धि होगी और प्राप्त राशि का उपयोग शहर के विकास तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) आवास योजनाओं में किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत यदि किसी विकसित कॉलोनी के भूखंड पर कॉलोनाइजर, भू-स्वामी या बिल्डर आवासीय अथवा व्यावसायिक परियोजना विकसित करता है, तो उसे मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 और मध्यप्रदेश नगर पालिक (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 के प्रावधानों के तहत कॉलोनी विकास अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही आश्रय शुल्क और विकास शुल्क का भुगतान भी करना होगा।
पुराने मामलों की भी होगी जांच
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि नए नियम लागू होने के बाद जारी भवन अनुज्ञाओं की भी समीक्षा की जाएगी। यदि किसी परियोजना में निर्धारित शुल्क कम जमा किया गया है, तो संबंधित कॉलोनाइजर या बिल्डर से अंतर की राशि वसूल की जाएगी। नगर निगम का मानना है कि इस फैसले से नियमों का बेहतर पालन सुनिश्चित होगा, राजस्व में बढ़ोतरी होगी और शहर के विकास कार्यों को गति मिलेगी।
मुख्य बिंदु
- विकसित कॉलोनियों के प्लॉट पर भी आश्रय एवं विकास शुल्क अनिवार्य।
- अपार्टमेंट, फ्लैट और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं नियम के दायरे में।
- कॉलोनी विकास अनुमति लेना होगा जरूरी।
- पुराने भवन अनुज्ञा मामलों की भी होगी जांच।
- कम शुल्क जमा होने पर अंतर की राशि वसूली जाएगी।
- निगम के राजस्व में वृद्धि और EWS-LIG आवास योजनाओं को मिलेगा लाभ।





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