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9 करोड़ की लैब, फिर भी सैकड़ों नमूनों की जांच लंबित:: इंदौर में लैब फिर भी भोपाल पर निर्भर, डेयरी उत्पादों की जांच अटकी ::

इंदौर। जनवरी से अब तक इंदौर में विभिन्न स्कूलों, होटलों और प्रतिष्ठानों से लिए गए सैकड़ों खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट अब भी भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला में लंबित है। इनमें शिशुकुंज स्कूल के सैंपल भी शामिल हैं। रिपोर्ट आने में हो रही देरी के कारण कई मामलों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है।

रिपोर्ट नहीं तो कार्रवाई कैसे?

खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार सैंपलिंग और जांच अभियान चलाने का दावा करता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लैब रिपोर्ट के बिना मिलावट या खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को कानूनी रूप से साबित करना संभव नहीं होता। ऐसे में दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई अधूरी रह जाती है और जांच लंबे समय तक खिंचती रहती है।

9 करोड़ की नई लैब भी नहीं आई काम

पिछले वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के तलावली चांदा क्षेत्र में करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक फूड टेस्टिंग लैब का लोकार्पण किया था। इसका उद्देश्य इंदौर और आसपास के जिलों के खाद्य नमूनों की स्थानीय स्तर पर जांच कर जल्द रिपोर्ट उपलब्ध कराना था।

हालांकि, लैब को अब तक एनएबीएल (NABL) प्रमाणन नहीं मिल सका है। इसके कारण यहां नियमित जांच शुरू नहीं हो पाई है। परिणामस्वरूप आज भी इंदौर के खाद्य नमूने जांच के लिए भोपाल भेजे जा रहे हैं, जिससे रिपोर्ट आने में लंबा समय लग रहा है।

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