ई-अटेंडेंस का नया पेच: डेटा लीक हुआ तो पेनल्टी शिक्षक भरेगा, बिना शर्त माने तो हाजिरी नहीं लगेगी
इंदौर संकेत प्रतिनिधि
भोपाल। ऑनलाइन ई-अटेंडेंस को लेकर पहले से परेशान सरकारी शिक्षकों के सामने शिक्षा विभाग ने नई शर्त खड़ी कर दी है। हमारे शिक्षक एप पर ड्यूटी टाइम लॉगइन करने से पहले शिक्षकों को डेटा सुरक्षा संबंधी शपथ पर सहमति देना अनिवार्य कर दिया गया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि शपथ पर सहमति न देने पर अटेंडेंस दर्ज ही नहीं हो रही है। एप और पोर्टल के अन्य विकल्प भी पूरी तरह ब्लॉक हो जाते हैं। ऐसे में बिना शर्तों को समझे शिक्षक सहमति देने के लिए मजबूर हैं। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) की ओर से एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर जारी इस दस्तावेज में शिक्षकों की निजी जानकारी, अटेंडेंस टाइम, जियो-लोकेशन और सिस्टम लॉग की गोपनीयता से जुड़ी शर्तें हैं। पोर्टल या एप से स्क्रीनशॉट, फोटो, डेटा डाउनलोड या शेयर करने पर रोक लगाई गई है। नियमों के उल्लंघन पर विभागीय कार्रवाई और लॉगइन बंद करने का प्रावधान है।
शिक्षकों का आरोप:एजेंसी की नाकामी, सजा भुगतेंगे हम
शिक्षकों का आरोप है कि भविष्य में किसी शिक्षक के लॉगइन से डेटा बाहर जाने या पोर्टल के गलत इस्तेमाल का मामला सामने आने पर इसी अंडरटेकिंग के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एप या पोर्टल से डेटा लीक होने पर जिम्मेदारी केवल शिक्षक की कैसे हो सकती है? पोर्टल संचालित करने वाली एजेंसी की क्या जवाबदेही होगी, यह तय नहीं है।
कोर्ट में मामला पेंडिंग, फिर भी थोपी जा रही शर्तें: ई-अटेंडेंस में डेटा प्राइवेसी और जियो-लोकेशन की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर है। न्यायालय की ओर से कोई विशेष निर्देश नहीं दिए जाने के बावजूद विभाग द्वारा अंडरटेकिंग लिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।





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