अब फिर होगा सर्वे, रिकॉर्ड से बाहर बोर्ड खोजकर होगी शुल्क वसूली
इंदौर संकेत प्रतिनिधि
इंदौर। शहर में दो लाख से अधिक दुकानें हैं, लेकिन इनमें लगी विज्ञापन बोर्डों की पूरी जानकारी नगर निगम के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है। यही वजह है कि दुकानों पर लगे बोर्डों से मिलने वाला विज्ञापन शुल्क हर साल महज एक से दो करोड़ रुपए के आसपास सिमट रहा है।
अब नगर निगम का मार्केट विभाग एक बार फिर शहर की दुकानों का सर्वे कराने जा रहा है। सर्वे के जरिए निगम यह पता लगाएगा कि शहर में कितने विज्ञापन बोर्ड लगे हैं, कितने निगम के रिकॉर्ड में दर्ज हैं और कितने बोर्ड बिना शुल्क दिए प्रचार का माध्यम बने हुए हैं। सर्वे और शुल्क वसूली के लिए निगम ने ठेकेदार एजेंसी की तलाश शुरू कर दी है। इसके लिए टेंडर जारी किया गया है। एजेंसी को मुख्य मार्गों के साथ गली-मोहल्लों, कॉलोनियों और बाजारों तक जाकर दुकानों और उन पर लगे विज्ञापन बोर्डों का डेटा तैयार करना होगा। इस बार निगम का फोकस उन बोर्डों को रिकॉर्ड में लाने पर भी है, जो अब तक सर्वे से छूट गए हैं। दरअसल, निगम नियमों के मुताबिक दुकान पर तीन फीट तक ऊंचे बोर्ड पर केवल दुकान का नाम लिखा होने पर विज्ञापन शुल्क नहीं लगता।
निगम पहले भी सर्वे और वसूली का काम एजेंसी को सौंप चुका है
निगम पहले भी सर्वे और वसूली का काम एजेंसी को सौंप चुका है, लेकिन पिछली एजेंसी काम अधूरा छोड़कर चली गई। अब नए सिरे से टेंडर जारी कर एजेंसी नियुक्त की जा रही है। एजेंसी को उसके काम के बदले प्रतिशत के आधार पर भुगतान किया जाएगा। निगम अधिकारियों का मानना है कि नया सर्वे पूरा होने के बाद शहर की दुकानों और विज्ञापन बोर्डों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार हो जाएगा। इसके साथ ही जिन बोर्डों से अब तक शुल्क नहीं मिल रहा है, उन्हें वसूली के दायरे में लाया जा सकेगा। इससे निगम की आय बढ़ने की उम्मीद है।




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