इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर का बहुचर्चित ब्राउन शुगर मामला लगातार नए खुलासे कर रहा है। राजेंद्र नगर थाना पुलिस की जांच अब केवल ड्रग्स तस्करी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसके तार ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी और जमीन से जुड़े कथित प्लॉट घोटाले तक पहुंचते नजर आ रहे हैं। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है। अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष **के भाई **नाना पटवारी से लगातार पूछताछ की जा रही है।
10.8 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ हुई थी गिरफ्तारी
मामले की शुरुआत तब हुई जब राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को 10.8 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपियों ने दावा किया कि वे यह खेप नाना पटवारी तक पहुंचाने जा रहे थे। आरोपियों के इस बयान के बाद पुलिस ने नाना पटवारी को पूछताछ के लिए बुलाया। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया गया, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ उन्हें लगातार पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सभी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।
पांच आरोपी गिरफ्तार, एक की तलाश
पुलिस ने इस मामले में अब तक इरफान खान, संजय कौशल, अयान, फैसल और इरफान अली को गिरफ्तार किया है। वहीं गिरोह के एक अन्य सदस्य की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस आरोपियों के मोबाइल, बैंक खातों, कॉल डिटेल और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है।

मोबाइल फोरेंसिक जांच में खुला ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे का नेटवर्क
ब्राउन शुगर मामले की जांच के दौरान जब आरोपियों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कराई गई तो आरोपी संजय कौशल के मोबाइल से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे से जुड़ी कई संदिग्ध आईडी और डिजिटल रिकॉर्ड मिले। इसके बाद पुलिस ने ऑनलाइन सट्टे का अलग प्रकरण दर्ज किया। इस मामले में मनीष जादौन, दिनेश और प्रीतेश त्रिपाठी को भी सह-आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ऑनलाइन सट्टे की आईडी तैयार कर व्हाट्सएप के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचाते थे। अब इनसे जुड़े बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
पहले भी दर्ज हो चुकी है एफआईआर
गौरतलब है कि इससे पहले ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा मामले में नाना पटवारी के चार कथित सहयोगियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। उस कार्रवाई के बाद पुलिस ने सट्टा नेटवर्क से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य जुटाए थे। अब ब्राउन शुगर मामले की जांच में मिले नए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के बाद पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या ड्रग्स नेटवर्क और ऑनलाइन सट्टा गिरोह के बीच कोई आर्थिक या परिचालन संबंध था। हालांकि पुलिस ने अभी तक आधिकारिक रूप से दोनों मामलों के बीच सीधे संबंध की पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।
शुभम वैली परियोजना के 374 प्लॉट भी जांच के दायरे में
ब्राउन शुगर और ऑनलाइन सट्टे की जांच के बीच अब जमीन से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले ने भी जांच की दिशा बदल दी है। डीसीपी नरेंद्र रावत के अनुसार, दो युवतियों ने शिकायत दर्ज कराई है कि वर्ष 2022 में उन्होंने शुभम वैली परियोजना में दो प्लॉट खरीदने के लिए एग्रीमेंट किया था। उनका आरोप है कि पूरा भुगतान करने के बावजूद आज तक रजिस्ट्री नहीं कराई गई। शिकायत में नाना पटवारी का नाम आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
374 प्लॉटों का रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
पुलिस ने शुभम वैली परियोजना के सभी 374 प्लॉटों का रिकॉर्ड मंगवाया है। जांच की जा रही है कि कितने प्लॉट बेचे गए, कितनों की रजिस्ट्री हुई और कितने खरीदार अब भी दस्तावेजों का इंतजार कर रहे हैं। यदि जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितता या धोखाधड़ी के साक्ष्य मिलते हैं तो इस मामले में भी अलग से आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। इस सिलसिले में परियोजना से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। सुमित मंत्री से पूछताछ हो चुकी है और उन्हें दोबारा नोटिस जारी किए जाने की तैयारी है।
बैंक खातों और संपत्तियों की भी जांच
जांच एजेंसियां अब ड्रग्स तस्करी, ऑनलाइन सट्टेबाजी और कथित जमीन कारोबार से जुड़े बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजैक्शन, संपत्तियों, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर रही हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अवैध कमाई का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
डीसीपी बोले- साक्ष्य मिले तो किसी को नहीं मिलेगी राहत
डीसीपी नरेंद्र रावत ने कहा कि पुलिस निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रही है। यदि जांच के दौरान नाना पटवारी या किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि जांच में किसी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते हैं तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
पुलिस का कहना है कि फिलहाल जांच कई महत्वपूर्ण चरणों में है और आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।





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