10 दिन तक जेसीबी और क्रेन से भी नहीं हिली प्रतिमा, अब विशेषज्ञ करेंगे जांच; रिपोर्ट के बाद तय होगा विस्थापन का तरीका और तारीख
दैनिक इंदौर संकेत | उज्जैन । सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर का ढांचा टूट गया, जेसीबी और क्रेन से प्रतिमा को हटाने की कोशिश हुई, मजदूरों ने भी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर में विराजित प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। करीब 10 दिनों तक चले लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार प्रशासन ने भी विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है।
मंगलवार को आईआईटी इंदौर की विशेषज्ञ टीम खड़े हनुमान मंदिर पहुंची और विशेष उपकरणों की मदद से प्रतिमा तथा उसके आसपास की संरचना की जांच की। टीम ने करीब दो घंटे तक प्रतिमा की गहराई, उसके आधार और आसपास की संरचना का अध्ययन किया। अब आईआईटी विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगे। इसी रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि प्रतिमा को किस तकनीक से और कब विस्थापित किया जा सकता है।
जेसीबी और क्रेन से भी नहीं हिली प्रतिमा
कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। सड़क को करीब 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। प्रस्तावित सड़क के हिस्से में खड़े हनुमान मंदिर का ढांचा आ रहा था। इसके चलते मंदिर के हिस्से को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। मंदिर का ढांचा हटाए जाने के बाद प्रतिमा को दूसरी जगह विस्थापित करने की कोशिश की गई। इसके लिए जेसीबी और क्रेन तक लगाई गईं। मजदूरों ने भी कई तरह से प्रयास किए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। लगातार प्रयासों के बाद प्रशासन ने प्रतिमा को नुकसान पहुंचने की आशंका को देखते हुए फिलहाल विशेषज्ञों की मदद लेने का निर्णय लिया।
करीब 1000 साल पुरानी होने की चर्चा
खड़े हनुमान की प्रतिमा को लेकर अब कई तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि प्रतिमा करीब 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है। पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि प्राचीन काल में प्रतिमाओं को स्थापित करने के लिए इंटरलॉक जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था। यदि यह प्रतिमा भी इसी तकनीक से स्थापित की गई है तो उस पर अत्यधिक बल लगाने से उसके क्षतिग्रस्त होने का खतरा हो सकता है। यही वजह है कि अब बिना विशेषज्ञों की सलाह के प्रतिमा को हटाने का प्रयास नहीं किया जाएगा।
आईआईटी की जांच के बाद होगा फैसला
मंगलवार को आईआईटी इंदौर की टीम ने विशेष उपकरणों की मदद से प्रतिमा की गहराई और उसके आसपास की संरचना की जानकारी जुटाई। टीम ने करीब दो घंटे तक जांच की। अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार है। नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया कि मंदिर के पंडित के आग्रह पर आईआईटी की टीम को बुलाया गया है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रतिमा के विस्थापन की प्रक्रिया और उसकी तारीख तय की जाएगी।
भक्तों में प्रतिमा नहीं हिलने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं
प्रतिमा के लगातार प्रयासों के बावजूद नहीं हिलने की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी खड़े हनुमान मंदिर की चर्चा तेज हो गई है। कई भक्त इसे भगवान का संकेत और चमत्कार मान रहे हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि यह मंदिर वर्षों से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां आने वाले कई लोग खड़े हनुमान को ‘डॉक्टर हनुमान’ कहते हैं, जबकि मंदिर को ‘उज्जैन का एम्स’ तक कहा जाता है। मान्यता है कि यहां बच्चों और बीमार लोगों के लिए मन्नत मांगने पर उनकी मनोकामना पूरी होती है।
हनुमान चालीसा का पाठ कर विरोध
प्रतिमा को हटाने की कोशिशों के दौरान स्थानीय लोगों, पुजारियों और हिंदू संगठनों में भी नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने प्रतिमा को हटाने के विरोध में हनुमान चालीसा का पाठ किया। श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया पूरी सावधानी और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए की जानी चाहिए। फिलहाल प्रशासन ने भी प्रतिमा को जबरन हटाने के बजाय विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार करने का फैसला किया है। अब सभी की नजर आईआईटी इंदौर की रिपोर्ट पर है, जिसके बाद यह स्पष्ट होगा कि सदियों पुरानी मानी जा रही इस प्रतिमा को किस तकनीक से सुरक्षित तरीके से विस्थापित किया जा सकता है।





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