ट्रांसफर आदेशों पर ‘ब्रेक’! विभागीय अनुशासन पर उठे सवाल
इंदौर। शिक्षा विभाग में इन दिनों एक अजीब स्थिति देखने को मिल रही है। शासन के तबादला आदेश लागू कराने की जिम्मेदारी जिस विभाग पर है, वहीं उसके कर्मचारी आदेशों को दरकिनार कर पुराने पदों पर ही जमे हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंजूरी और प्रभारी मंत्री की सहमति से जारी स्थानांतरण आदेशों के बाद भी कई बाबू और अधिकारी नई पदस्थापना पर जाने के बजाय अपनी पुरानी कुर्सियां नहीं छोड़ रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि यदि शासन के आदेशों का पालन ही नहीं होगा तो स्थानांतरण नीति का औचित्य क्या रह जाएगा?
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में स्थानांतरण नीति-2026 के तहत 25 और 36 कर्मचारियों के तबादले किए गए थे। सामान्यतः स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद संबंधित कर्मचारी तत्काल कार्यमुक्त होकर नई जगह कार्यभार ग्रहण करता है, लेकिन यहां तस्वीर उलटी दिखाई दे रही है। एक दर्जन से अधिक कर्मचारी अभी भी पुराने कार्यालयों और स्कूलों में जमे हुए हैं।
इसमें भी सेटिंग का खेल जारी!
ट्रांसफर निरस्तीकरण के इस खेल में डीईओ कार्यालय एक बार फिर चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाबुओं के जरिए कुछ कर्मचारियों के ट्रांसफर रुकवाने और निरस्तीकरण कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। कर्मचारियों पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर से भी दबाव बनाए जाने की चर्चा है।
आदेश पर आदेश… फिर भी नहीं हिले
स्थिति को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने पहले सभी स्थानांतरित कर्मचारियों को तत्काल जॉइनिंग के निर्देश दिए। जब इसका असर नहीं हुआ तो दूसरा आदेश जारी कर सभी कर्मचारियों को दो दिन के भीतर ऑनलाइन रिलीव करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद भी केवल डीडीओ लॉगिन पर ही प्रक्रिया अटकी रही।
15 जुलाई तक रिलीव करने के निर्देश
शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर आदेशों के विरुद्ध दावा-आपत्ति दर्ज कराने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया था। इसलिए जिन कर्मचारियों ने दावा-आपत्ति नहीं की है, उन्हें फिलहाल रिलीव नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि लगभग 10 कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगी होने के कारण भी उनकी रिलीविंग रुकी हुई है।
सीधी बात : डीईओ शौर्य मल्होत्रा
प्रश्न: कलेक्टर के अनुमोदन के बाद भी कई कर्मचारी नई जगह जॉइन नहीं कर पाए हैं, जबकि मुख्यमंत्री के निर्देश जारी हो चुके हैं?
उत्तर (डीईओ शौर्य मल्होत्रा): शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर आदेशों के विरुद्ध दावा-आपत्ति के लिए 15 जुलाई तक समय दिया था। जिन कर्मचारियों ने दावा-आपत्ति नहीं की है, उन्हें नियमानुसार रिलीव किया जाएगा।
प्रश्न: दावा-आपत्ति की समय सीमा समाप्त होने के बाद क्या कार्रवाई होगी?
उत्तर: 15 जुलाई के बाद सभी दावा-आपत्तियों का निराकरण किया जाएगा। जिन मामलों में ट्रांसफर आदेश यथावत रहेंगे, संबंधित कर्मचारियों को तत्काल रिलीव कर नई पदस्थापना पर भेजा जाएगा।
प्रश्न: यदि इसके बाद भी कोई कर्मचारी नई जगह जॉइन नहीं करता तो क्या कार्रवाई होगी?
उत्तर: विभागीय नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में आवश्यक प्रशासनिक एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। शासन के निर्देशों का पालन सभी कर्मचारियों को करना होगा।

सूत्रों का कहना है कि कई कर्मचारियों की मान्य आपत्तियों के कारण उन्हें अभी तक रिलीव नहीं किया गया है। वहीं कुछ कर्मचारी नए पदस्थापन स्थल पर पहुंच चुके हैं। अब विभाग की निगाहें 15 जुलाई के बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।




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