इंदौर संकेत प्रतिनिधि
इंदौर। इंदौर के वार्ड 24 से पार्षद जीतू यादव की अब 20 माह बाद एमआईसी में वापसी तय हो गई है। जीतू के बीजेपी छोड़ने की चल रही सुगबुगाहट के बाद पार्टी ने फिर एमआईसी में लेने का फैसला किया है।
बीजेपी के वार्ड 65 से पार्षद कमलेश कालरा और वार्ड 24 के पार्षद जीतू यादव के बीच विवाद के बाद पार्टी ने जीतू को 6 साल के लिए बाहर कर दिया था। इसके साथ ही उनका एमआईसी का पद भी चला गया। पुलिस से क्लीन चिट के बाद 8 अगस्त को जीतू यादव की पार्टी में वापसी हो गई थी, लेकिन पार्टी ने एमआईसी पद देने पर रोक लगा दी थी। अब उनकी वापसी तय हो गई है। जनवरी 2025 में कालरा के घर पर कुछ गुंडों ने हमला किया था, इसमें जीतू समर्थकों का नाम आने के बाद उन्हें पार्टी से बाहर किया था। विवाद एक ऑडियो विवाद के बाद हुआ, जिसमें निगम के एक कर्मचारी को कालरा ने जीतू को लेकर गलत शब्द कहे। इस पर समर्थक भड़क गए थे।
भोपाल में बैठक के बाद तय
भोपाल में जीतू के करीब नेताओं की प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ मुलाकात हुई। बताया जा रहा है कि विधायक रमेश मेंदोला, विधायक गोलू शुक्ला और अन्य नेता इसमें थे। इसमें जीतू की बात रखी गई और उन्हें फिर एमआईसी में लेने की मांग की गई। चर्चा के बाद पार्टी ने उन्हें एमआईसी में लेने की हामी भर दी। इसके बाद औपचारिक पत्र भी जारी कर दिया गया।
विधानसभा चार का विरोध खारिज
जीतू की वापसी के खिलाफ विधानसभा चार के नेता थे। कारण है कि यहां सिंधी बाहुल्य है और इन्हीं के पार्षद कमलेश कालरा के साथ जीतू का विवाद हुआ था। विधायक मालिनी गौड़ के साथ पार्षद कालरा जुड़े हुए हैं। वापसी के बाद कालरा ने प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर जीतू को बाहर करने की मांग भी की थी, लेकिन पार्टी ने विधानसभा चार का विरोध खारिज करते हुए जीतू को न केवल अपनाया बल्कि अब एमआईसी पद भी दिया जा रहा है।
जीतू ने बना लिया था पार्टी छोड़ने का मन
दरअसल 8 अगस्त को पार्टी में वापस आने के बाद भी एमआईसी पद देने से इंकार हो गया था। इसके बाद जीतू ने पार्टी छोड़ने का मन बना लिया और सोशल मीडिया से पार्टी का लोगो और नाम हटा दिया और खुद को सामान्य पार्षद और जनसेवक कहा।





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