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नेपाल में बाढ़ का कहर: 389 लोगों की मौत, करीब 1000 लापता; 290 भारतीयों से संपर्क नहीं, दिल्ली-काठमांडू बस सेवा भी रुकी

तिब्बत सीमा से आई विनाशकारी बाढ़ ने मचाई भारी तबाही, सड़कें-पुल और हाइड्रो पावर परियोजनाएं प्रभावित; भारतीयों की तलाश के लिए 24 घंटे का कंट्रोल रूम सक्रिय

काठमांडू। नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। तिब्बत सीमा क्षेत्र से अचानक आए तेज जलप्रवाह ने कई बस्तियों, सड़कों और पुलों को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ के बाद अलग-अलग प्रभावित जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए जा रहे हैं। 27 अगस्त की रात तक मृतकों की संख्या बढ़कर 389 हो गई है, जबकि करीब एक हजार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

कई जिलों में भारी तबाही

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी के इलाकों में दिखाई दिया है। नदियों में अचानक बढ़े जलस्तर और तेज बहाव के कारण कई इलाकों का संपर्क टूट गया। कई पुल बह गए और सड़कें क्षतिग्रस्त होने से राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।

एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग जिलों में बरामद शवों में रसुवा से 17, नुवाकोट से 28, धादिंग से 33, चितवन से 137, गोरखा से 32, तनहुं से 28, नवलपरासी ईस्ट से 87 और नवलपरासी वेस्ट से 27 शव शामिल हैं।

बाढ़ के कारण कई हाइड्रो पावर परियोजनाएं प्रभावित

विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है। कई पुल और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। नदियों के किनारे बसे इलाकों में मलबा और पानी भरने के कारण स्थानीय लोगों के सामने भोजन, सुरक्षित ठिकाने और संपर्क की समस्या खड़ी हो गई है।

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई इस आपदा में सड़क, पुल और बिजली से जुड़े ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं

नेपाल की बाढ़ में भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। अमर उजाला के रात के अपडेट के मुताबिक 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि त्रिशूली-1 परियोजना में काम करने वाले 63 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि तमिलनाडु के 21 लोगों को भी सुरक्षित निकाला गया है।

विदेश मंत्रालय लगातार नेपाल सरकार और भारतीय दूतावास के संपर्क में है। भारतीय नागरिकों की स्थिति का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए प्रयास जारी हैं।

भारत ने बनाया 24 घंटे का कंट्रोल रूम

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए भारत के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में 24 घंटे चलने वाला विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया है।

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी संपर्क माध्यम:

फोन:
+91 11 2308 8718
+91 11 2308 8719
+91 11 2301 2113

WhatsApp:
+91 9968291988

ईमेल:
situationroom@mea.gov.in

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास में भी आपातकालीन सहायता व्यवस्था सक्रिय की गई है।

तमिलनाडु के लोगों समेत कई भारतीयों को बचाया गया

नेपाल में राहत अभियान के दौरान भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का काम जारी है। अमर उजाला के अनुसार त्रिशूली-1 परियोजना से जुड़े 63 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। इसके अलावा तमिलनाडु के 21 लोगों को भी बचाया गया है।

विदेश मंत्रालय ने सुरक्षित निकाले गए 63 भारतीय नागरिकों के नाम भी जारी किए हैं।

हेलिकॉप्टर से पहुंचाई जा रही राहत सामग्री

भारी तबाही के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से प्रभावित इलाकों के लिए बड़ी संख्या में हेलिकॉप्टर उड़ान भर रहे हैं। इन हेलिकॉप्टरों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने के साथ-साथ फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। नेपाल सेना अभियान के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण कई इलाकों तक जमीनी रास्ते से पहुंचना मुश्किल बना हुआ है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने प्रभावित इलाके का दौरा किया

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बाढ़ प्रभावित नुवाकोट जिले का दौरा कर राहत और बचाव अभियान की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और बचाव कार्यों की जानकारी ली।

नुवाकोट के देवीघाट सहित कई इलाकों में बाढ़ से मकान और सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रहने और भोजन की समस्या खड़ी हो गई है।

दिल्ली-काठमांडू बस सेवा रोकी गई

बाढ़ की गंभीर स्थिति का असर भारत और नेपाल के बीच सड़क संपर्क पर भी पड़ा है। दिल्ली से काठमांडू के बीच चलने वाली बस सेवा फिलहाल रोक दी गई है। इसके अलावा 29 अगस्त की नेपाली बस सेवा को भी होल्ड पर रखा गया है। यात्रियों को स्थिति सामान्य होने और ताजा प्रशासनिक निर्देश मिलने तक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

भारत फिर भेजेगा राहत सामग्री

नेपाल में जारी राहत अभियान के बीच भारत की ओर से भी मदद जारी है। एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार भारत 28 अगस्त को नेपाल के लिए फिर राहत सामग्री भेजेगा। इससे पहले भी भारत ने आपदा प्रभावित पड़ोसी देश की मदद के लिए राहत प्रयास शुरू किए हैं।

भूकंप के झटकों से भी बढ़ी चिंता

बाढ़ की त्रासदी के बीच नेपाल में 27 अगस्त को भूकंप के झटके भी महसूस किए गए। एबीपी के अनुसार इसकी तीव्रता 3.2 दर्ज की गई। हालांकि मौजूदा आपदा के मुख्य कारण के संबंध में अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में ग्लेशियर/बर्फ और चट्टान के अचानक खिसकने से बने तेज जलप्रवाह की बात सामने आई है।

आगे भी खतरे की आशंका

बाढ़ के बाद कुछ स्थानों पर नदी के प्रवाह में रुकावट के कारण पानी जमा होने की स्थिति सामने आई है। इससे आगे भी अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। आपदा एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं और प्रभावित इलाकों में बचाव तथा राहत अभियान जारी है।

नेपाल में जारी यह आपदा सिर्फ प्राकृतिक तबाही नहीं, बल्कि राहत और बचाव एजेंसियों के सामने भी बड़ी चुनौती बन गई है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण आने वाले घंटों में मृतकों और प्रभावितों का आंकड़ा बदल सकता है। फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक भोजन व जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना है।

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