सोमवार को शाम शहरवासियों और राहगीरों के लिए भारी परेशानी लेकर आई। शहर के कई मुख्य मार्गों पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। शाम करीब चार बजे से शुरू हुआ जाम और सवारी का सिलसिला रात आठ बजे तक चलता रहा। इस दौरान आधा शहर जाम की चपेट में रहा और वाहन चालक घंटों सड़कों पर फंसे रहे।
जाम के लिए शहर के मुख्य मार्गों का इस्तेमाल किए जाने से कई स्थानों पर यातायात को रोककर या एक तरफ से चलाया गया। जिससे कई सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई मार्गों पर वाहन रेंगते हुए आगे बढ़ते नजर आए। लोगों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में भी काफी समय लग गया। जाम में फंसे वाहन चालकों ने व्यवस्था को लेकर नाराजगी दिखाई दी।
लोगों का कहना था कि बाबा के मार्ग और बावजात प्रकरण को लेकर पहले से बेहतर तैयारी की जा सकती थी। यातायात के दौरान लोगों के वाहनों पर रोक लगने से कुछ और विकल्प उपलब्ध कराए जाने चाहिए थे। सड़कों पर तेज आवाजाही में कई देर घंटों के शहरवासी और आसपास के रहवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं कई पार्कों को बैरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया गया था। इसके चलते वैकल्पिक मार्गों पर भी वाहनों का दबाव बढ़ गया और वहीं जाम की स्थिति बनने लगी।

त्योहार का पर्व नजदीक होने के कारण शहर के कई बाजारों और प्रमुख मार्गों पर रातों को दुकानों में भीड़ बढ़ी हुई थी। इसलिए स्थिति को संभालने के लिए आने वाले लोगों के वाहनों के कारण पहले से खचाखच भरे मार्गों पर यातायात और प्रभावित हुआ।
यातायात, बाजारों की भीड़ और अस्थायी दुकानों के कारण कई इलाकों में स्थिति बेकाबू नजर आई। सबसे चिंताजनक स्थिति उस समय बनी, जब जाम में एंबुलेंस भी फंस गई। जामग्रस्त स्थिति में मरीजों को लेकर जा रही एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिलने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजन के लिए अनुमति देते समय प्रशासन को आमजन की परेशानी भी समझना चाहिए। चंद लोगों के दबाव में हजारों लोगों को परेशान करना कतई उचित नहीं है।






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