25 करोड़ की जमीन के लिए एजेंसी को करना होगा 37 करोड़ का काम
इंदौर। एमओजी लाइन के करोड़ों के प्लॉट बिक नहीं रहे तो स्मार्ट सिटी कंपनी ने अब बिक्री का ऐसा फॉर्मूला निकाला है, जो सामान्य प्रॉपर्टी डील से बिल्कुल अलग है। कंपनी अब प्लॉट बेचने के बजाय काम करवाकर जमीन देने की तैयारी में है। यानी एजेंसी पहले एमओजी लाइन में बिजली और दूसरी यूटिलिटी लाइनों को अंडरग्राउंड करेगी और बदले में उसे करीब 25 करोड़ रुपए कीमत का प्लॉट मिलेगा। हालांकि सौदा सिर्फ इतना आसान नहीं है, काम की अनुमानित लागत 37 करोड़ रुपए है, इसलिए एजेंसी को अंतर की करीब 12 करोड़ रुपए राशि भी कंपनी को देनी होगी।
स्मार्ट सिटी कंपनी ने नया रास्ता तो निकाल लिया है, लेकिन अब देखना यह होगा कि 37 करोड़ रुपए का काम करने के बाद 25 करोड़ का प्लॉट लेने और करीब 12 करोड़ रुपए अतिरिक्त चुकाने के इस प्रस्ताव में कितनी एजेंसियां रुचि दिखाती हैं। यदि एजेंसी मिल गई तो एमओजी लाइन में लंबे समय से अटकी प्लॉट बिक्री और अंडरग्राउंड यूटिलिटी, दोनों समस्याओं का एक साथ समाधान हो सकता है।
टेंडर निकले, आकार घटा, फिर भी नहीं बिके प्लॉट
एमओजी लाइन को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत नए सिरे से विकसित करने की योजना बनाई गई थी। यहां बहुमंजिला इमारतों के निर्माण के अनुरूप प्लॉट विकसित किए गए। इन्हें बेचने के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी ने कई बार टेंडर जारी किए, लेकिन खरीदार सामने नहीं आए। बड़े प्लॉट को लेकर रुचि कम हुई तो कंपनी ने भूखंडों का आकार तक छोटा कर दिया। इसके बावजूद बिक्री नहीं हुई।
अब कंपनी ने प्लॉट बेचने की रणनीति ही बदल दी है। नए मॉडल में एजेंसी को करीब 37 करोड़ रुपए का अंडरग्राउंड यूटिलिटी का काम करना होगा। इसके बदले कंपनी करीब 25 करोड़ रुपए का प्लॉट देगी। काम की लागत और प्लॉट की कीमत का अंतर यानी करीब 12 करोड़ रुपए एजेंसी को अतिरिक्त रूप से चुकाना होगा। यानी स्मार्ट सिटी कंपनी को प्लॉट का खरीदार ढूंढने के साथ-साथ 37 करोड़ रुपए के काम के लिए अलग से भुगतान करने की जरूरत नहीं होगी। दूसरी ओर एजेंसी को जमीन के रूप में भुगतान का हिस्सा मिलेगा।






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