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रक्षाबंधन पर बन रहा अद्भुत-दुर्लभ संयोग

ग्रहों की विशेष चाल से 6 महाशुभ योग के साथ 4 अन्य प्रमुख धार्मिक पर्व व 1 अंतरराष्ट्रीय दिवस, तथा ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं

धार/इंदौर। सनातन धर्म में श्रावण मास की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन मनाया जाता है। इस संदर्भ में मालवा के ज्योतिष गुरु डॉ. अशोक शास्त्री ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि दिनांक 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा बहुत अद्भुत और दुर्लभ संयोग लेकर आ रही है। इस दिन रक्षाबंधन के साथ-साथ 4 अन्य प्रमुख धार्मिक पर्व, 1 अंतरराष्ट्रीय दिवस और चंद्र ग्रहण का साया रहेगा। वहीं दूसरी ओर, ग्रहों की विशेष चाल से 6 महाशुभ योग बन रहे हैं।

वरलक्ष्मी व्रत

धन, समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति के लिए रखा जाने वाला माता लक्ष्मी का अत्यंत फलदायी व्रत।

विश्व संस्कृत दिवस

प्राचीन और वैदिक भाषा ‘संस्कृत’ के संरक्षण व सम्मान में प्रतिवर्ष श्रावण पूर्णिमा को संस्कृत दिवस मनाते हैं।

चंद्र ग्रहण का साया

इस बार रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण की छाया भी रहेगी। किंतु यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए हमारे यहां ग्रहण का कोई महत्व नहीं होगा। डॉ. अशोक शास्त्री के अनुसार रक्षाबंधन को बनने वाले 6 दुर्लभ शुभयोग ग्रहण के बावजूद, ग्रहों की स्थिति और तिथि-नक्षत्र के मेल से इस दिन 6 अत्यंत शक्तिशाली शुभ योग बन रहे हैं।

सुकर्मा योग: कार्यों में सफलता और शुभफल प्रदान करने वाला योग।

त्रिपुष्कर योग: इस योग में किए गए दान, पुण्य या कार्य का फल तीन गुना होकर मिलता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग: सभी मनोकामनाओं को सिद्ध करने वाला और नए कार्यों के लिए श्रेष्ठ योग।

धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रक्षाबंधन

भाई-बहन के स्नेह और रक्षा का महापर्व।

श्रावणी उपाकर्म: वैदिक परंपरा में द्विज (ब्राह्मण व जनेऊधारी) इस दिन नदी तट पर प्रायश्चित पूजन कर नया यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण करते हैं।

नारली पूर्णिमा: समुद्र तटीय क्षेत्रों (विशेषकर महाराष्ट्र) में वरुण देव को नारियल अर्पित कर यह पर्व मनाया जाता है।

गायत्री जयंती: वेदमाता गायत्री का प्राकट्य दिवस, जो ज्ञान और सात्विकता का प्रतीक है।

श्रेष्ठ योग

सूर्य स्वगृही योग: सूर्य देव अपनी स्वयं की राशि (सिंह) में विराजमान रहकर तेज और मान-सम्मान में वृद्धि करेंगे।

बुधादित्य/अधियोग: सूर्य-बुध की सिंह राशि में युति से बनने वाला यह राजयोग प्रशासनिक, बौद्धिक क्षेत्र में सफलता दिलाता है।

हंस/गुरु राजयोग: देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि (कर्क) में होकर अपार समृद्धि, ज्ञान और भाग्य में वृद्धि का योग बना रहे हैं।

राखी बांधने का सबसे शुभ समय

राखी बांधने का सबसे शुभ समय: 09:48 बजे तक।

सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: प्रातःकाल 06:23 से।

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:14 से 01:05 बजे तक।

गोधूलि मुहूर्त: सायं 06:57 से 07:19 बजे तक।

चौघड़िया मुहूर्त:
लाभ: सुबह 07:57 से 09:31 तक।
अमृत: सुबह 09:31 से 11:05 तक।
शुभ: दोपहर 12:40 से 02:14 तक।
चर: शाम 05:22 से 06:57 तक।
लाभ: रात्रि 09:48 से 11:14 तक।

नोट: राहुकाल: दिन में 11:05 से दोपहर 12:40 तक। इसलिए अभिजीत मुहूर्त में बांधते वक्त इसका ध्यान रखें। संक्षेप में कहें तो चंद्र ग्रहण का कोई भी छाया-दोष भारत में नहीं लग रहा है। बहनें बिना हिचकिचाहट अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर इस पावन पर्व को पूरे उत्साह के साथ मना सकती हैं।

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