मेंदोला-गोलू-सुमित की प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल, ताई समर्थक ज्योति तोमर की वापसी या नए चेहरे पर दांव?
इंदौर। भाजपा की सियासत में एक बार फिर संगठनात्मक जमावट को लेकर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। पूर्व एमआईसी सदस्य ज्योति तोमर की वापसी के बाद अब महिला मोर्चा अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पार्टी के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला और सुमित मिश्रा की प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद महिला मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
मामला केवल महिला मोर्चा अध्यक्ष चुनने तक सीमित नहीं है। इंदौर भाजपा में संगठन के भीतर किसकी पकड़ मजबूत है और आने वाले समय में किस खेमे को कितनी राजनीतिक जगह मिलेगी, इस लिहाज से भी इस नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुमित मिश्रा और गोलू शुक्ला की जुगलबंदी का खेल!
नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की संगठन में सक्रियता चर्चा में है। वहीं गोलू शुक्ला की ओर से महिला मोर्चा अध्यक्ष पद के लिए माधुरी जायसवाल का नाम सामने आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सुमित मिश्रा और गोलू शुक्ला की जुगलबंदी से माधुरी जायसवाल को जिम्मेदारी मिलेगी या फिर महिला मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आएगा?
विधानसभा-3 से तीन नाम, मेंदोला समर्थक भी मैदान में
पार्टी सूत्रों के मुताबिक महिला मोर्चा अध्यक्ष पद के लिए विधानसभा क्रमांक-3 से माधुरी जायसवाल, दुर्गा जोशी और श्वेता जोशी के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। इनके अलावा विधायक रमेश मेंदोला की समर्थक मानी जाने वाली राधा राठौर का नाम भी दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है। इन नामों के सामने आने से संगठन के भीतर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की तस्वीर भी दिखाई दे रही है। वहीं पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष ज्योति तोमर का नाम भी अभी पूरी तरह दौड़ से बाहर नहीं माना जा रहा है।
ऐसा क्यों उलझा मामला?
महिला मोर्चा अध्यक्ष पद के लिए इस बार जिस तरह की कवायद चल रही है, वैसी स्थिति पहले देखने को कम ही मिली है। बताया जाता है कि मध्यप्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अभिलाषा पुरोहित के स्तर पर भी नाम को लेकर पर्याप्त सहमति नहीं बन सकी है। इसके बाद मामला पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचा। नियुक्ति अब महज महिला मोर्चा के पदाधिकारी के चयन का सवाल नहीं रह गई है। इसके पीछे इंदौर भाजपा में चल रही राजनीतिक खींचतान और बदलते शक्ति-संतुलन को भी देखा जा रहा है। यही कारण है कि हर दावेदार के पीछे खड़े राजनीतिक समीकरणों को भी संगठन नजरअंदाज नहीं कर पा रहा है।
ताई का प्रभाव या नया नेतृत्व?
एक विकल्प यह माना जा रहा है कि पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष और ताई समर्थक मानी जाने वाली ज्योति तोमर को दोबारा जिम्मेदारी सौंपी जाए। उनके पास संगठनात्मक अनुभव है और भाजपा के पुराने समीकरणों से भी उनके संबंध बताए जाते हैं। दूसरी ओर संगठन में नए चेहरे को सामने लाकर महिला मोर्चा में नई ऊर्जा और नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने के संकेत भी देखे जा रहे हैं। पार्टी यदि नया चेहरा चुनती है तो इंदौर भाजपा में नई पीढ़ी और नए संगठनात्मक नेतृत्व को बढ़ावा देने का संदेश जा सकता है।
फैसला छोटा, संदेश बड़ा
इंदौर भाजपा में महिला मोर्चा अध्यक्ष का पद भले ही संगठनात्मक दृष्टि से एक नियुक्ति हो, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इसका महत्व काफी बढ़ गया है। मेंदोला-गोलू-सुमित की सक्रियता, ज्योति तोमर की संभावित वापसी और नए नामों की दावेदारी को इंदौर भाजपा की बदलती राजनीतिक तस्वीर के अलग-अलग हिस्सों के तौर पर देखा जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा नेतृत्व पुराने भरोसे को दोहराता है या नए चेहरे के जरिए इंदौर संगठन में नई राजनीतिक जमावट की शुरुआत करता है।




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