नगर निगम के बहुचर्चित नामांतरण 350 से ज्यादा संपत्तियों के रिकॉर्ड में निकली गड़बड़ी
इंदौर। नगर निगम के बहुचर्चित नामांतरण घोटाले में अब कार्रवाई आगे बढ़ने वाली है। घोटाले की जांच के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय समिति के साथ शासन के आईटी एक्सपर्ट को भी जांच में शामिल किया गया था। निगम सूत्रों के मुताबिक ई-नगर पालिका पोर्टल से घोटाले से जुड़ा लगभग पूरा डेटा अब निगम को मिल चुका है। डेटा एनालिसिस और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी और दोषियों के खिलाफ जल्द एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने मंगलवार सुबह नामांतरण घोटाले को लेकर कहा कि पोर्टल से रिकॉर्ड और डेटा हासिल करने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। अब इसकी जांच की जा रही है। जो भी व्यक्ति इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ एफआईआर सहित सख्त कार्रवाई की जाएगी। तीन सदस्यीय समिति कर रही जांच-घोटाला सामने आने के बाद निगमायुक्त ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई थी। इसमें अपर आयुक्त आकाश सिंह, अर्ध जैन और आईटी विभाग के कपिल गहलोत को शामिल किया गया। इसके बाद शासन स्तर से आईटी एक्सपर्ट की मदद भी ली गई। निगम ने कुछ लोगों को नोटिस देकर संपत्तियों की खरीद-फरोख्त के संबंध में पूछताछ के लिए बुलाया था। पूछताछ में संबंधित लोगों ने संपत्तियां उनके नाम होने की जानकारी से ही इनकार किया। अब निगम की जांच में सबसे अहम कड़ी ई-नगरपालिका पोर्टल का डेटा…
350 से ज्यादा संपत्तियों में बदले गए नाम
दरअसल, निगम में नामांतरण से जुड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था। जांच में 350 से ज्यादा संपत्तियों के नामांतरण में अनियमितता सामने आने की बात कही गई थी। खास बात यह थी कि इनमें से कई संपत्तियों के वास्तविक मालिकों को इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि निगम के संपत्ति कर रिकॉर्ड में उनका नाम कब और कैसे बदल गया। मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ गई क्योंकि इनमें से 51 संपत्तियां नामांतरण के बाद बेची भी जा चुकी थीं। आगे की जांच में यूजर आईडी, लॉगिन टाइम और संपत्तियों के दस्तावेज होंगे। इसी के आधार पर यह तय होगा कि फर्जी नामांतरण किसने किए और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। निगमायुक्त के एफआईआर के संकेत के बाद अब इस मामले में जल्द बड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।






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