कॉलोनी सेल के अफसरों ने बिना दस्तावेज जांचे दे डाली विकास अनुमति, बिल्डर चौधरी ले आया स्टे
इंदौर। खातीपुरा क्षेत्र में बिल्डर नीलेश चौधरी और उनके परिवार की करीब 200 करोड़ रुपये की जमीन पर विकसित की जा रही स्वास्तिक ग्रांड कॉलोनी फिर विवादों में घिर गई है। हाल ही में हुई कई शिकायतों की जांच में सामने आया कि जिन सर्वे नंबरों पर कॉलोनी विकास की जा रही है, उनमें से एक सीलिंग की जमीन भी है। जिला प्रशासन ने कॉलोनी सेल से प्रोजेक्ट की मंजूरी देने संबंधी आवश्यक दस्तावेज मांगे, लेकिन वे उपलब्ध नहीं कराए गए। इस बीच विकास अनुमति निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही बिल्डर नीलेश चौधरी संभागायुक्त कोर्ट से स्टे ले आया। स्टे 31 जुलाई 2026 को दिए गए आवेदन पर सुनवाई के बाद करीब दो महीने के लिए प्रभावी रहेगा।
जांच में सामने आया कि बिल्डर चौधरी ने अधिकारियों के समक्ष अधिवक्ता अभिषेक मेहता के भाई नवीन मेहता की जमीन दर्शाई थी। नवीन के बेटे मेहुल मेहता की कंपनी टफनेस इन्फ्रा प्रोजेक्ट भी सर्वे नंबर 12 पर प्रस्तावित है। दो महीने पहले मेहुल ने विकास अनुमति के लिए आवेदन किया था। उस समय कॉलोनी सेल प्रभारी रोशनी पाटीदार ने इसे सीलिंग की जमीन बताते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। बाद में इसी सर्वे नंबर पर नीलेश चौधरी के स्वास्तिक ग्रांड प्रोजेक्ट को अनुमति दे दी गई। अधिकारियों से जब स्वास्तिक ग्रांड की फाइल मांगी गई तो उसमें आदेश की प्रति नहीं मिली, केवल आदेश क्रमांक दर्ज था। अपर कलेक्टर राकेश वैश्य की जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित जमीन का सीलिंग वाला सर्वे नंबर 12 भी शामिल है। इसके बाद 3 जुलाई को कॉलोनी की विकास अनुमति निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
स्वास्तिक ग्रांड कॉलोनी का सबसे बड़ा हिस्सा सर्वे नंबर 12 पर विकसित किया जा रहा है। यह तीन-चार सर्वे नंबरों की करीब 17 हेक्टेयर जमीन पर फैली है। इनमें से सर्वे नंबर 12 का क्षेत्रफल करीब साढ़े सात हेक्टेयर है। यानी कॉलोनी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी सर्वे नंबर पर स्थित है।
लापरवाही से बिल्डर को मिला मौका
कॉलोनी सेल ने विकास अनुमति निरस्त करने का आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया। साथ ही रजिस्ट्री कार्यालय को सूचना देकर पंजीयन पर रोक लगाने, रिकॉर्ड में सीलिंग भूमि दर्ज कराने और संबंधित सर्वे नंबर पर रोक लगाने जैसी जरूरी कार्रवाई समय पर नहीं की गई। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर बिल्डर अदालत से स्टे लेने में सफल हो गया।
रिकॉर्ड में सीलिंग दर्ज होती तो नहीं मिलता स्टे
अधिकारियों की मानें तो यदि समय रहते करीब 15 दिन पहले ही राजस्व रिकॉर्ड में जमीन को सीलिंग की भूमि के रूप में दर्ज करा दिया जाता, तो उसी दिन बिल्डर नीलेश चौधरी को संभागायुक्त कोर्ट से स्टे नहीं मिल पाता।
अब 18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
बिल्डर नीलेश चौधरी ने कलेक्टर के आदेश को चुनौती देते हुए 21 जुलाई को संभागायुक्त कोर्ट में अपील दायर की थी। अब मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। इस संबंध में अपर कलेक्टर राकेश वैश्य और एसडीएम रोशनी पाटीदार से पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका। वहीं बिल्डर चौधरी को भी कॉल और संदेश भेजे गए, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।



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