इंदौर। मध्यप्रदेश में प्रशासनिक मुखिया बदलते ही सत्ता के गलियारों में बदलाव की आहट तेज हो गई है। नए मुख्य सचिव की ताजपोशी के महज 24 घंटे के भीतर हुई बड़ी प्रशासनिक सर्जरी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में प्रदेश की प्रशासनिक तस्वीर तेजी से बदल सकती है। इसका असर सबसे पहले इंदौर में दिखाई दिया है।
इंदौर संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाडे को भोपाल बुलाकर मुख्यमंत्री का सचिव बनाया गया है। प्रशासनिक गलियारों में इस बदलाव को नए मुख्य सचिव के साथ उनकी करीबी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन सत्ता के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सिद्धार्थ जैन को अभी ‘मैदान’ नहीं
इंदौर जिला पंचायत के सीईओ रह चुके सिद्धार्थ जैन को फिलहाल कोई मैदानी जिम्मेदारी नहीं दी गई है। इसे भी प्रशासनिक हलकों में कई तरह से देखा जा रहा है। चर्चा है कि पुराने मुख्य सचिव के करीबी अधिकारियों के भविष्य को लेकर नई व्यवस्था में फिलहाल मंथन चल रहा है। हालांकि, इंदौर जैसे बड़े और महत्वपूर्ण जिले में जिला पंचायत सीईओ रहते हुए सिद्धार्थ जैन की कार्यशैली को लेकर भी कोई खास चर्चा नहीं रही।
‘नए लक्ष्य’ के साथ इंदौर पहुंचे नए आयुक्त
इधर, इंदौर संभाग को नया आयुक्त मिल गया है। नए संभागायुक्त के सामने इंदौर जैसे महत्वपूर्ण संभाग की प्रशासनिक चुनौतियों से निपटने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। उनके पास नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। नए आयुक्त के आने के साथ ही इंदौर संभाग की प्रशासनिक कार्यशैली में बदलाव की उम्मीदें भी जताई जा रही हैं। अब देखना होगा कि वे इंदौर के विकास, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय को किस तरह नई दिशा देते हैं।
हिमांशु प्रजापति इंदौर में ही, बदली कुर्सी
इधर, हिमांशु प्रजापति भी इंदौर में ही रहेंगे, लेकिन उनकी जिम्मेदारी बदल दी गई है। अब उन्हें जिला पंचायत सीईओ बनाया गया है। यानी प्रशासनिक फेरबदल में इंदौर से पूरी तरह विदाई नहीं, बल्कि कुछ अधिकारियों की कुर्सी बदली है और कुछ को नई जिम्मेदारियां मिली हैं।




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