अपहरण की झूठी रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस को किया गुमराह, एक महीने बाद कंकाल मिलने से खुला सनसनीखेज हत्याकांड
भोपाल। राजधानी भोपाल के देहात क्षेत्र में अंधविश्वास और गढ़े धन (दफीना) की लालच ने एक पिता को इस कदर अंधा बना दिया कि उसने अपनी ही नाबालिग बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को खेत में दफना दिया और खुद पुलिस थाने पहुंचकर बेटी के अपहरण की झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी। करीब एक महीने बाद खेत से मिले मानव कंकाल और पुलिस की गहन जांच ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है।
देहात पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार पाण्डेय ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 3 अप्रैल 2026 को सूखीसेवनिया थाना क्षेत्र के एक ग्रामीण ने अपनी नाबालिग बेटी के कथित अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि रात में खलिहान में सोते समय कोई अज्ञात व्यक्ति उसकी बेटी को उठाकर ले गया। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर व्यापक स्तर पर तलाश शुरू की, लेकिन लंबे समय तक किशोरी का कोई सुराग नहीं मिला।
एक महीने बाद खेत में मिला मानव कंकाल
करीब एक महीने बाद 7 मई 2026 को जिस स्थान से किशोरी के लापता होने की बात कही गई थी, उससे लगभग 200 मीटर दूर एक खेत में मानव कंकाल मिलने की सूचना मिली। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मर्ग कायम किया और फॉरेंसिक जांच शुरू कराई। मेडिकल राय और प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने कंकाल का डीएनए परीक्षण कराने की प्रक्रिया शुरू की, ताकि उसकी पहचान सुनिश्चित की जा सके। इसी दौरान पुलिस ने किशोरी के परिजनों से भी दोबारा पूछताछ की।
शक के घेरे में आया पिता, फिर हो गया फरार
जांच के दौरान सबसे बड़ा संदेह उस पिता पर गया जिसने खुद अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी बीच वह अचानक अपने घर से गायब हो गया। पुलिस ने उसकी गुमशुदगी भी दर्ज की और उसकी तलाश शुरू कर दी। पूछताछ के दौरान आरोपी की पत्नी ने भी अपनी बेटी के साथ अनहोनी की आशंका जताते हुए अपने पति पर ही शक जाहिर किया। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिरों और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपी की तलाश तेज कर दी। आखिरकार पुलिस ने आरोपी को विदिशा जिले के गंजबासौदा से गिरफ्तार कर लिया।
दफीने के लालच में बेटी की ले ली जान
पुलिस पूछताछ में आरोपी पिता ने जो खुलासा किया, उसने सभी को झकझोर कर रख दिया। उसने बताया कि वह अपने दो साथियों के साथ मिलकर खेत में गढ़ा हुआ सोना-चांदी (दफीना) निकालना चाहता था। अंधविश्वास के चलते उसे विश्वास दिलाया गया था कि दफीना निकालने के लिए मानव बलि आवश्यक है। इसी अंधविश्वास में उसने अपनी नाबालिग बेटी को रात के समय खेत में ले जाकर पहले डंडों से बेरहमी से पीटा। जब बेटी गंभीर रूप से घायल होकर अधमरी हो गई, तब भी उसका दिल नहीं पसीजा। उसने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी ने शव को खेत में ही गड्ढा खोदकर दफना दिया और अगले दिन सामान्य व्यवहार करते हुए पुलिस थाने पहुंचकर बेटी के अपहरण की झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी, ताकि किसी को उस पर शक न हो।

हत्या में प्रयुक्त डंडा बरामद
आरोपी के कबूलनामे और जांच के आधार पर पुलिस ने अपहरण के मामले में हत्या सहित अन्य गंभीर धाराओं का इजाफा किया है। आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया डंडा भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस अब आरोपी के दोनों साथियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
इस टीम ने किया सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा
एसपी पंकज कुमार पाण्डेय के निर्देशन में सूखीसेवनिया थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझाई। टीम में थाना प्रभारी रामबाबू चौधरी, उपनिरीक्षक सी.एल. यादव, सहायक उपनिरीक्षक राजेश दण्डोतिया, प्रधान आरक्षक चितरंजन मीना, आरक्षक नरोत्तम लोधी, संजय सिंह, सुमित शाक्य, गजानंद, रवि सिंह परिहार तथा साइबर सेल के मुश्ताक अहमद, योगेश मिश्रा, योगेश भावसार और रूपेन्द्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वैज्ञानिक साक्ष्यों, तकनीकी जांच और लगातार की गई पूछताछ के आधार पर इस अंधे हत्याकांड का खुलासा संभव हो सका।





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