ओंकारेश्वर/उज्जैन। राम मंदिर चंदा विवाद के बाद मध्य प्रदेश के महाकाल, ओंकारेश्वर, सलकनपुर और देवास मंदिरों की दान व्यवस्था की पड़ताल में बड़ा खुलासा हुआ है। यहां सोना-चांदी दान का हिसाब नहीं मिलने, फर्जी समिति द्वारा चंदा वसूली जैसे कई तथ्य सामने आए हैं। अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद मध्य प्रदेश के बड़े मंदिरों की दान व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है।
मंदिर से जुड़े लोग लंबे समय से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। आरोप है कि गिनती में बड़े नोट कम निकलते हैं। पहले भी दान पेटी से पैसे निकालने के वीडियो वायरल हुए थे। इसके बावजूद व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। जब सवाल पूछा गया तो सहायक प्रशासक उदय मंडलोई ने जवाब टाल दिया। उन्होंने सहायक कलेक्टर एवं प्रशासक अशोक महाजन से बात करने की सलाह दी। वहीं अशोक महाजन ने एसडीएम पंकज वर्मा से संपर्क करने को कहा। एसडीएम ने न फोन उठाया और न ही संदेश का जवाब दिया।
महाकाल में गिनती की खास व्यवस्था
उज्जैन के महाकाल मंदिर में दान गिनती के लिए विशेष व्यवस्था बनाई गई है। परिसर में एक पारदर्शी कक्ष बनाया गया है, जहां बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में दान पेटियां खोली जाती हैं। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाती है। गिनती कक्ष में जाने के लिए सख्त नियम हैं। जेब वाले कपड़े पहनने पर रोक रहती है। कई बार कपड़ों को भी सील कर दिया जाता है। अधिकारियों की ड्यूटी भी समय-समय पर बदली जाती है।
ओंकारेश्वर का हिसाब अधूरा
ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार दान पेटियों का आंकड़ा सार्वजनिक किया है। ट्रस्ट के अनुसार, जुलाई के पहले सप्ताह में 24 लाख 41 हजार रुपये दान प्राप्त हुआ। यहां हर मंगलवार और शुक्रवार को दान पेटियां खोली जाती हैं।
हालांकि ऑनलाइन दान, प्रसाद और लड्डू बिक्री से होने वाली आय का हिसाब अभी भी सार्वजनिक नहीं किया गया है। श्रद्धालु 300 रुपये देकर शीघ्र दर्शन की सुविधा लेते हैं और प्रतिदिन हजारों लोग इसका लाभ उठाते हैं, लेकिन इस आय का विस्तृत ब्यौरा अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।






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