इंदौर। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाली आषाढ़ गुप्त नवरात्रि इस वर्ष 16 जुलाई से 23 जुलाई तक मनाई जाएगी। इस बार चतुर्थी तिथि के क्षय होने के कारण गुप्त नवरात्रि नौ दिन की बजाय आठ दिनों की रहेगी। हालांकि तिथि क्षय के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और देवी उपासना में कोई कमी नहीं आएगी। इस बार गुप्त नवरात्रि की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और पुष्य नक्षत्र जैसे अत्यंत शुभ संयोगों में हो रही है, जिसे साधना और पूजा-पाठ के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्षभर में कुल चार नवरात्रियां आती हैं। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि सार्वजनिक रूप से मनाई जाती हैं, जबकि माघ और आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से तंत्र-मंत्र, साधना और देवी की दस महाविद्याओं की उपासना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इन दिनों साधक विशेष अनुष्ठान, मंत्र जाप और तपस्या कर सिद्धि प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
16 जुलाई से होगा शुभारंभ
पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि का आरंभ 15 जुलाई की दोपहर 3:14 बजे से होगा और यह 16 जुलाई सुबह 11:42 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 16 जुलाई, बुधवार से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ माना जाएगा। इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, पुष्य नक्षत्र तथा चंद्रमा का स्थिर राशि में होना शुभ संयोग बना रहा है, जिससे पूजा-अर्चना और साधना का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा।
23 जुलाई को होगा समापन
गुप्त नवरात्रि का समापन 23 जुलाई को भड़ली नवमी के दिन होगा। इस दौरान श्रद्धालु देवी दुर्गा की आराधना, हवन, अनुष्ठान और विशेष मंत्र जाप करेंगे। साधकों के लिए यह अवधि आध्यात्मिक उन्नति और सिद्धि प्राप्ति का श्रेष्ठ समय मानी जाती है।

देवी मंदिरों में होंगे विशेष धार्मिक आयोजन
गुप्त नवरात्रि के अवसर पर इंदौर के प्रमुख देवी मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। बिजासन माता मंदिर, अन्नपूर्णा माता मंदिर, हरसिद्धि माता मंदिर सहित अन्य शक्तिपीठों में प्रतिदिन महाआरती, दुर्गा सप्तशती का पाठ, विशेष श्रृंगार, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचेंगे।
दस महाविद्याओं की होती है साधना
गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से दस महाविद्याओं की साधना के लिए प्रसिद्ध है। इन महाविद्याओं में काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की उपासना की जाती है। मान्यता है कि इनकी आराधना से साधकों को आध्यात्मिक शक्ति, ज्ञान, आत्मबल और विशेष सिद्धियों की प्राप्ति होती है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व
धर्माचार्यों के अनुसार गुप्त नवरात्रि के दौरान विधि-विधान से देवी की पूजा, दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र जाप, दान-पुण्य और व्रत रखने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। इस बार शुभ योगों के दुर्लभ संयोग के कारण गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। श्रद्धालु इन आठ दिनों में माता की आराधना कर सुख-समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करेंगे।




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