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डीएवीवी : तीन साल में पीएचडी पूरी करने की तैयारी, कैलेंडर जारी

इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए डिग्री और नॉन-डिग्री श्रेणी के लिए विस्तृत शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य शोध कार्यों को व्यवस्थित कर पीएचडी पूरी करने की अवधि को वर्तमान चार से छह वर्ष के बजाय तीन वर्ष तक सीमित करना है।

जारी कार्यक्रम के अनुसार सभी विषयों के लिए रिसर्च एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (RET) 31 जुलाई के बीच आयोजित किए जाएंगे। विभागों को 31 जुलाई तक चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद 3 अगस्त से 31 अक्टूबर तक 40 विषयों का पीएचडी कोर्स वर्क संचालित होगा। सेमेस्टर परीक्षाएं 16 से 21 नवंबर के बीच होंगी और 30 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे। इसके बाद शोधार्थी अपने शोध एवं थीसिस कार्य की शुरुआत कर सकेंगे।

तीन वर्षों में 55 फीसदी घटी पीएचडी में रुचि

विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश के प्रति छात्रों का रुझान लगातार कम हो रहा है। पिछले तीन वर्षों में पीएचडी आवेदनों में करीब 55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। शिक्षाविदों का मानना है कि निजी विश्वविद्यालयों की बढ़ती लोकप्रियता और 27 विषयों में नेट अनिवार्यता इसके प्रमुख कारण हैं। वहीं केवल 13 इंजीनियरिंग विषयों में ही नेट की अनिवार्यता नहीं है। विषयों के अनुसार आवेदनों में बड़ा अंतर देखने को मिला है। फिजिक्स में 28 सीटों के लिए केवल दो आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि कम्प्यूटर साइंस में 34 सीटों पर 16 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। दूसरी ओर लॉ में 11 सीटों के लिए 74 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

कई विषयों में सीटें ज्यादा, आवेदन कम

प्रवेश आंकड़ों के अनुसार कई विषयों में उपलब्ध सीटों की तुलना में आवेदन काफी कम आए हैं। कॉमर्स में 156 सीटों के मुकाबले केवल 39 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि मैनेजमेंट में 99 सीटों के लिए 53 उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। नॉन-डिग्री श्रेणी के 25 विषयों में कुल 507 सीटें उपलब्ध हैं, जिनके लिए 176 शोध मार्गदर्शक नियुक्त हैं। इस श्रेणी में नेट उत्तीर्ण 509 अभ्यर्थियों ने पंजीयन कराया है।

समाजशास्त्र में पांच सीटों के लिए 51 आवेदन और अर्थशास्त्र में 22 सीटों के लिए 94 पंजीयन प्राप्त हुए हैं। ये विषय इस वर्ष सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी शोध कार्यक्रमों में शामिल हैं।

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