शक्ति प्रदर्शन की कोशिश पर गुटबाजी भारी, कई नेताओं ने बनाई कार्यक्रम से दूरी
महू। ग्राम चोरल में कांग्रेस नेता अशोक सैनी द्वारा आयोजित महिला संवाद एवं कार्यकर्ता सम्मेलन राजनीतिक रूप से ज्यादा कांग्रेस के संगठन की कमजोरी को लेकर चर्चा में रहा। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मौजूदगी के बावजूद कांग्रेस से जुड़े कई वरिष्ठ नेता और जमीनी कार्यकर्ता कार्यक्रम से दूर रहे। इससे पार्टी के अंदर चल रही खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई।
कार्यक्रम में महिलाओं की भीड़ जुटाने के लिए चुनरी एवं कलश यात्रा निकाली गई। इसके एक दिन पहले क्षेत्र में साड़ियों का वितरण भी किया गया, जिससे धार्मिक आस्था के चलते बड़ी संख्या में महिलाएं पंडाल तक पहुंचीं। इसके विपरीत पुरुष कार्यकर्ताओं और कांग्रेस के जमीनी नेताओं की उपस्थिति अपेक्षा से काफी कम रही। राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस के शक्ति प्रदर्शन से ज्यादा चुनरी यात्रा के सहारे भीड़ जुटाने का प्रयास माना जा रहा है।कार्यक्रम के अगले दिन कांग्रेस की गुटबाजी, संगठन की कमजोरी और स्थानीय नेताओं की उपेक्षा पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही। सवाल यह भी उठे कि जिस क्षेत्र में आयोजन हुआ, उससे लगे गांवों के कई सक्रिय कांग्रेस नेता और महू कांग्रेस के कार्यकर्ता भी कार्यक्रम में क्यों नहीं पहुंचे?
बड़े नेताओं के सामने भी नहीं दिखी संगठन की ताकत
कार्यक्रम में भले प्रदेश के बड़े नेता मौजूद थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने के प्रयास नजर नहीं आए। यदि सभी गुटों को साथ लेकर तैयारी की जाती तो यह आयोजन व्यापक रूप ले सकता था। इसके उलट यह कार्यक्रम कांग्रेस के अंदरूनी खींचतान, गुटबाजी और कमजोर संगठन को लेकर ज्यादा चर्चा में रहा।
गुटबाजी, निजीकरण और उपेक्षा की चर्चा
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार सीमित लोगों तक ही सीमित रहा। कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें न तो समय पर सूचना दी गई और न ही तैयारियों में शामिल किया गया। कार्यक्रम के निजीकरण और संगठन की अनदेखी के कारण बड़ी संख्या में सक्रिय कार्यकर्ताओं ने दूरी बनाई।
कार्यक्रम में जिला युवा अध्यक्ष गजेंद्र राठौर, कांग्रेस नेता विजय तिवारी, वरिष्ठ नेता महेश शर्मा, पप्पू मालवीय, युवेंद्र पटेलदार, बाबूलाल भूत, कार्यवाहक अध्यक्ष हरिराम जालविया, ब्लॉक अध्यक्ष विष्णु मालवीय, मनमोहन गुणावत मानपुर, ब्लॉक कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. अजयसिंह धनावत, जनपद सदस्य विक्रम राठौरिया, कोदरिया क्षेत्र के वरिष्ठ नेता राजेश मगन, जयनारायण पाटीदार सहित अनेक नेताओं, मंडलम एवं सेक्टर अध्यक्ष, कई जनपद सदस्य, सरपंच और बड़ी संख्या में सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ता नदारद रहे।
15 वर्षों से संगठन अधूरा
महू कांग्रेस के संगठन को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। बताया जाता है कि पिछले करीब 15 वर्षों से शहर कांग्रेस अध्यक्ष और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर स्थानीय नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। इसका सीधा असर संगठन की सक्रियता और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर दिखाई दे रहा है। प्रदेश के अधिकांश जिलों और ब्लॉकों में संगठन की नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं, लेकिन महू अब भी इससे अछूता है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर महू में नियुक्तियां लंबित रहने के पीछे क्या कारण हैं? क्या स्थानीय नेताओं की जिला और प्रदेश नेतृत्व तक प्रभावी पकड़ नहीं है या फिर महू को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है?
स्थानीय नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते संगठन को मजबूत कर कार्यकर्ताओं को साथ नहीं जोड़ा गया तो आगामी विधानसभा सहित अन्य चुनावों में कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।






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