इंदौर। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इन दिनों गंभीर जल संकट से जूझ रही है। हालात ऐसे हैं कि हजारों परिवारों तक पानी पहुंचाने के लिए नगर निगम को बड़े स्तर पर टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है। शहर में प्रतिदिन करीब 750 टैंकर पानी की आपूर्ति कर रहे हैं, इसके बावजूद कई इलाकों से पानी नहीं मिलने और सप्लाई में देरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इसी बीच नगर निगम ने नई व्यवस्था लागू करते हुए अब सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक ही पानी का वितरण करने का फैसला लिया है। रात के समय टैंकरों से पानी की सप्लाई पर रोक लगा दी गई है।
मांग बढ़ने पर निजी एजेंसियों के टैंकर भी उतारे गए
शुरुआत में नगर निगम ने अपने करीब 350 ट्रैक्टर टैंकर और बड़े टैंकर जल वितरण के लिए लगाए थे, लेकिन पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए निजी एजेंसियों की मदद भी ली गई। वर्तमान में शहर के अलग-अलग वार्डों में करीब 750 टैंकर प्रतिदिन पानी पहुंचाने का काम कर रहे हैं। हाल के वर्षों में इसे सबसे बड़े टैंकर वितरण अभियानों में शामिल माना जा रहा है।
पानी की कालाबाजारी पकड़ में आने के बाद बदली व्यवस्था
जल संकट के बीच पानी की कालाबाजारी के मामले भी सामने आए। निगम अधिकारियों के मुताबिक रात की शिफ्ट में रहवासी क्षेत्रों के लिए लगाए गए कुछ टैंकर होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पानी बेचते पाए गए। शिकायतों और जांच के बाद संबंधित एजेंसियों पर जुर्माना लगाया गया, जबकि कुछ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। इसके बाद निगम ने रात के समय टैंकर संचालन बंद करने का निर्णय लिया।
हाइड्रेंट बंद होने से टंकियों पर बढ़ा दबाव
स्थिति को और जटिल बना रहा है शहर के कई हाइड्रेंट का बंद होना। अधिकारियों के अनुसार जल स्रोत सीमित होने के कारण अब टैंकरों को सीधे पानी की टंकियों से भरकर भेजा जा रहा है। इससे वितरण प्रक्रिया में अधिक समय लग रहा है और कई क्षेत्रों में सप्लाई प्रभावित हो रही है।
नगर निगम कंट्रोल रूम और जोन कार्यालयों में पानी नहीं मिलने, कम दबाव से सप्लाई होने और टैंकरों के देर से पहुंचने की शिकायतें लगातार दर्ज हो रही हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए जोनल अधिकारियों को मौके पर भेजा जा रहा है और संवेदनशील इलाकों की विशेष निगरानी की जा रही है।

मानसून का इंतजार, टैंकरों के भरोसे शहर
जल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पानी की मांग और बढ़ सकती है। फिलहाल शहर की बड़ी आबादी की प्यास टैंकरों के भरोसे ही बुझ रही है। ऐसे में सड़कों पर दौड़ते 750 टैंकर और पानी के इंतजार में बैठे रहवासी मौजूदा जल संकट की गंभीर तस्वीर पेश कर रहे हैं। एक तरफ लगातार दौड़ते टैंकर हैं, तो दूसरी तरफ पानी के लिए परेशान लोग। यह स्थिति साफ संकेत दे रही है कि इंदौर में फिलहाल पानी केवल जरूरत नहीं, बल्कि सबसे बड़ी चिंता बन चुका है।





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