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पश्चिमी–पूर्वी रिंग रोड परियोजना पर किसानों का गुस्सा फूटा

इंदौर। जिले में प्रस्तावित पूर्वी रिंग रोड और इंदौर–मनमाड़ रेल लाइन परियोजना को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। पूर्वी रिंग रोड किसान कल्याण संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि या तो परियोजना को निरस्त किया जाए या प्रभावित किसानों को वर्तमान बाजार भाव से कम से कम चार गुना मुआवजा दिया जाए।

संघ का कहना है कि यह परियोजना 44 गांवों की अति उपजाऊ, सिंचित कृषि भूमि को प्रभावित कर रही है, जहां साल में तीन से चार फसलें ली जाती हैं। किसानों का आरोप है कि बिना उनकी सहमति भूमि अधिग्रहण करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

किसानों की मुख्य मांगें

  • पूर्वी रिंग रोड को निरस्त किया जाए
  • यदि परियोजना बनाना अनिवार्य है तो अलाइनमेंट बदला जाए और मार्ग 5–6 किलोमीटर दूर निकाला जाए
  • शासकीय, पड़त, बंजर या वन भूमि का उपयोग किया जाए
  • प्रभावित किसानों को बाजार मूल्य से कम से कम चार गुना मुआवजा दिया जाए
  • सभी किसानों को समान दर पर मुआवजा मिले
  • कृषि भूमि की गाइडलाइन दरें वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप बढ़ाई जाएं

किसानों की चिंता

किसानों का कहना है कि यदि उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण वर्तमान स्वरूप में किया गया, तो हजारों परिवारों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो जाएगा। वे न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, बल्कि राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा में भी योगदान देते हैं।

कलेक्टर पहुंचे किसानों के बीच

धरने के दौरान कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं किसानों के बीच पहुंचे और उनकी समस्याओं को सुना। उन्होंने प्रतिनिधियों से चर्चा कर आश्वासन दिया कि प्रशासन उनकी मांगों और सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगा।

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