विधायक के पीए से लेकर कलेक्ट्रेट के बाबू के रूप में कर रहे थे काम
स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्षों से विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों और जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों में अटैच (संलग्न) शिक्षकों को वापस स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने 16 जिलों के 213 शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त करते हुए उन्हें तत्काल अपने मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग पहले भी कई बार ऐसे आदेश जारी कर चुका था, लेकिन कार्रवाई पूरी तरह लागू नहीं हो सकी थी।
विधायक और प्रशासनिक कार्यालयों में थे पदस्थ
समीक्षा के दौरान पाया गया कि कई शिक्षक विधायक कार्यालयों में निजी सहायक (पीए) के रूप में कार्यरत थे। वहीं कुछ शिक्षक कलेक्टर कार्यालय, जिला पंचायत, जनपद पंचायत, एसडीएम कार्यालय, जिला निर्वाचन कार्यालय, राजस्व विभाग और शिक्षा विभाग के विभिन्न कार्यालयों में लंबे समय से पदस्थ थे। इससे कई स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता प्रभावित हो रही थी। बड़ी संख्या में शिक्षक वर्षों से स्कूलों के बजाय विभिन्न कार्यालयों में सेवाएं दे रहे थे। समीक्षा के बाद विभाग ने सभी मामलों में अटैचमेंट समाप्त करने का निर्णय लिया। डीपीआई ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त कर उनके मूल विद्यालयों में भेजा जाए तथा इसकी जानकारी संचालनालय को उपलब्ध कराई जाए। विभाग का मानना है कि शिक्षकों की स्कूलों में वापसी से विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई का लाभ मिलेगा और शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
वर्षों से स्कूलों से दूर थे शिक्षक
कुछ शिक्षक एक दशक से भी अधिक समय से विद्यालयों से बाहर कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार दो सहायक शिक्षक क्रमशः वर्ष 2008 और 2015 से मंत्रालय में अटैच बताए गए हैं। इसके अलावा कई शिक्षकों की सेवाएं विधायक कार्यालयों, पाठ्यपुस्तक निगम और अन्य संस्थानों में भी ली जा रही थीं।





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