भोपाल। प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2026-27 का शुभारंभ हो चुका है। सरकारी स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल भी लौट आई है। स्कूलों में विद्यार्थी रंग-बिरंगे गणवेश में पहुंच रहे हैं। इनमें नए प्रवेशित विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। हालांकि इस बार भी लाखों विद्यार्थियों को निर्धारित समय पर स्कूल गणवेश नहीं मिल पाएगा।
स्कूल खुलने के बावजूद पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब 52 लाख विद्यार्थियों को सिली-सिलाई गणवेश के लिए अक्टूबर या नवंबर तक इंतजार करना पड़ सकता है। इस वर्ष शासन ने गणवेश वितरण की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए विद्यार्थियों के खातों में राशि भेजने के बजाय सीधे सिली-सिलाई गणवेश उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम को सौंपी गई है। हालांकि टेंडर प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में भी नहीं पहुंची है, जिससे गणवेश वितरण का काम प्रभावित होने की आशंका है। मप्र पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा गणवेश आपूर्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जल्द पूरी होगी टेंडर प्रक्रिया
दो वर्ष पूर्व भी सरकार ने विद्यार्थियों को सिली-सिलाई ड्रेस उपलब्ध कराने का निर्णय लिया था। उस समय कपड़े की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के नाप को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद पिछले साल 600 रुपये विद्यार्थियों के खातों में दिए गए थे। मप्र पाठ्यपुस्तक निगम के महाप्रबंधक संजीव त्यागी का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी।






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