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20 करोड़ की सरकारी जमीन का बन गया फर्जी नामांतरण आदेश

इंदौर • इंदौर की सांवेर तहसील के चिंतोड़ा गांव में करीब 20 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की सरकारी जमीन के नामांतरण का फर्जी आदेश सामने आया है। जमीन लंबे समय से निजी नाम पर दर्ज है और इस पर प्राथमिक कृषि साख समिति से कर्ज भी लिया गया है। इंदौर की सांवेर तहसील के चिंतोड़ा गांव की एक सरकारी जमीन लंबे समय से निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज है। मामला तब और गंभीर हो गया, जब यह जमीन किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दी गई। जमीन खरीदने वाले ने नामांतरण के लिए नायब तहसीलदार के पास आवेदन दिया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि आवेदन पर कार्रवाई होने से पहले ही नामांतरण का फर्जी आदेश तैयार कर लिया गया।

जुलाई 2025 में सांवेर के जमीन राजेश वर्मा से खरीदी है। रिकॉर्ड में जमीन खरीदने की तारीख 24 जून 2021 बताई गई। साथ ही यह भी लिखा गया कि तेजूबाई ने अपने नाम नाम करने के लिए आवेदन दिया था और उसका आवेदन मंजूर कर लिया गया। लेकिन जांच में यह नामांतरण आदेश फर्जी निकला।

फर्जी आदेश

असल में इस मामले का असली आदेश 6 अक्टूबर 2025 को जारी हुआ था और इसे खबर भी कही थी। आदेश में साफ लिखा था कि तेजूबाई और राजेश वर्मा दोनों ही कोर्ट में पेश नहीं हुए। पटवारी की रिपोर्ट में सामने आया कि यह जमीन साल 1956 से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज रही है। इसके अलावा जमीन सहकारी समिति में बंधक है और उस पर कर्ज भी चल रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जमीन अहस्तांतरणीय है, यानी इसे बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर नामांतरण की मांग खारिज कर दी गई थी।

नायब तहसीलदार सीएल टाक के नाम से एक नामांतरण आदेश जारी किया गया। आदेश में लिखा था कि तेजूबाई ने 1.456 हेक्टेयर जमीन राजेश वर्मा से खरीदी है। रिकॉर्ड में जमीन खरीदने की तारीख 24 जून 2021 बताई गई। साथ ही यह भी लिखा गया कि तेजूबाई ने अपने नाम नाम करने के लिए आवेदन दिया था और उसका आवेदन मंजूर कर लिया गया। लेकिन जांच में यह नामांतरण आदेश फर्जी निकला। तहसीलदार सीएल टाक ने साफ कहा कि जुलाई 2025 में जारी किया गया नामांतरण आदेश फर्जी है। उन्होंने बताया कि यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है और पहले हरिजन संस्था के नाम पर रही है। जमीन का रिकॉर्ड दुरुस्त कराने और इसे दोबारा सरकारी दर्ज कराने के लिए फाइल उच्च स्तर पर भेजी गई है। तहसीलदार के मुताबिक, फर्जी नामांतरण आदेश तैयार कर जमीन की खरीद-बिक्री करने की कोशिश की जा रही है।

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