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आईडीए स्कीम 171 से मुक्ति के लिए रहवासी खुलकर उतरे, सीएम घोषणा के बाद भी सुस्ती

इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की स्कीम 171 को मुक्त किए जाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के 18 दिन बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से रहवासियों में नाराजगी बढ़ गई है। इसी के चलते रहवासियों ने बैठक कर खुलकर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।

इंदौर स्कीम 171 से मुक्ति के लिए करीब दर्जनभर गृह निर्माण सोसायटी के हजारों प्लॉटधारक पिछले 33 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। मध्य प्रदेश शासन के नियमों के तहत प्लॉटधारकों ने विकास शुल्क के रूप में 5.89 करोड़ रुपये अक्टूबर 2024 में जमा कर दिए थे। इसके बावजूद अब तक समाधान नहीं निकला है, जिससे लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। पीड़ित प्लॉटधारकों ने बैठक कर चरणबद्ध आंदोलन का फैसला लिया है। आंदोलन की शुरुआत सोशल मीडिया पर विरोध स्वरूप पोस्टर जारी कर की गई है। इसके बाद तय रणनीति के अनुसार आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

इस तरह के पोस्टर किए गए जारी

प्लॉटधारकों ने कई तरह के पोस्टर जारी किए हैं। इनमें कहा गया है कि “हमारे 33 साल बर्बाद हुए हैं। एक पीढ़ी इंतजार में गुजर गई है। न औपचारिक रूप से जमीन अधिग्रहित की गई और न ही विकास हुआ। मकान बनाने के लिए एनओसी भी नहीं दी जा रही है। जबकि आईडीए शासन के नियमों के तहत 22 दिसंबर 2024 को पूरी राशि ले चुका है। इसके बावजूद स्कीम क्लोज करने का नोटिफिकेशन अब तक जारी नहीं हुआ। न्याय में देरी भी अन्याय है। वर्ष 1993 में स्कीम आई थी, तब से न विकास हुआ और न ही मुक्ति मिली। यह जमीन हमारा अधिकार है और अब हम आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। हमें हमारा अधिकार चाहिए।”

क्या है पूरा विवाद

वर्ष 1993 में आईडीए ने 13 सोसायटियों की जमीन और आसपास की सरकारी एवं अन्य जमीनों को मिलाकर स्कीम 132 लॉन्च की थी। इस स्कीम का विरोध हुआ और हाईकोर्ट ने वर्ष 2007 में इसे निरस्त (लैप्स) कर दिया। इसके बाद वर्ष 2009 में आईडीए ने इसी क्षेत्र के लिए नई स्कीम 171 लागू की। लेकिन प्लॉटधारकों को अब तक न मुआवजा मिला और न ही स्कीम पर कोई विकास कार्य हुआ। धीरे-धीरे यह स्कीम भी विवादों में फंसती चली गई।

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