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देपालपुर के सांदीपनि मॉडल स्कूल में बसें न होने से अभिभावक परेशान

ग्रामीण क्षेत्रों के 12 स्कूलों को मॉडल स्कूल में विलय किया, लेकिन छात्रों को लाने की व्यवस्था नहीं

देपालपुर। मध्यप्रदेश सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना के तहत हर गरीब बच्चे को उच्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से प्रदेशभर में सर्वसुविधायुक्त सांदीपनि शासकीय उत्कृष्टतर माध्यमिक मॉडल विद्यालयों की शुरुआत की जा रही है। इसी कड़ी में देपालपुर में भी अत्याधुनिक सर्वसुविधायुक्त सांदीपनि मॉडल स्कूल का नया भवन बनकर तैयार हो चुका है। इस नई बिल्डिंग को जल्द ही हैंडओवर कर लिया जाएगा, जिसकी पूरी प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है और इसी सत्र से इसमें नियमित पढ़ाई भी शुरू हो जाएगी।

शासन के निर्देशानुसार क्षेत्र के देपालपुर, तामलपुर, बिरगोदा, खजराया, गिरोड़ा, तिकोपुरा, अहिलावास, किरखेड़ा, बड़ोली सहित करीब 12 शासकीय स्कूलों को इस नए मॉडल स्कूल में विलय किया गया है। पहले जहां पुरानी बिल्डिंग में कक्षा 8वीं से 12वीं तक के करीब 800 छात्र पढ़ते थे, वहीं अब नई बिल्डिंग में कक्षा 1ली से 12वीं तक के लगभग 1600 बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था की गई है। सरकार की इस योजना से बच्चों को बेहतर शिक्षा की उम्मीद तो जगी है, लेकिन वर्तमान में परिवहन व्यवस्था न होना अभिभावकों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है।

मजदूरी छोड़ 10 से 12 किमी दूर बच्चों को छोड़ने आ रहे परिजन

स्कूल में परिवहन (बस) सुविधा शुरू नहीं होने के कारण अभिभावकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिजनों का कहना है कि उन्हें रोजाना 10 से 12 किलोमीटर दूर से बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने आना पड़ता है। हमें प्रवेश के समय आश्वासन दिया गया था कि बच्चों को लाने-ले जाने के लिए स्कूल बस की सुविधा मिलेगी। विद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे मजदूर परिवारों से हैं। अब सुबह और शाम बच्चों को लाने-ले जाने के चक्कर में माता-पिता को रोजाना की मजदूरी छोड़नी पड़ रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। जब इस संबंध में स्कूल प्रबंधन से बात की गई, तो बताया गया कि बसों को अनुबंधित (अटैच) करने के लिए अभी टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। शासन स्तर पर इसकी कागजी कार्रवाई चल रही है। जब तक टेंडर नहीं हो जाते, तब तक अभिभावकों को स्वयं ही बच्चों को स्कूल लाना और ले जाना पड़ेगा।

ऐसे में पालकों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया तो लंबी चलती है, जिसमें एक महीना या इससे अधिक भी लग सकता है। ऐसे में हम कब तक अपनी मजदूरी छोड़कर रोजाना बच्चों को स्कूल से लाना-ले जाना करते रहेंगे। इससे अच्छा तो हमारे लिए गांव में जो स्कूल संचालित हो रहे थे, वही अच्छे थे, जिनमें बच्चे खुद से आना-जाना तो कर लेते थे।

सांदीपनि मॉडल स्कूल के प्रभारी प्राचार्य अमित भंडारी ने बताया कि विद्यालय में छात्रों की संख्या पहले की तुलना में दोगुनी हो गई है। जहां पहले करीब 800 विद्यार्थी अध्ययनरत थे, वहीं अब आसपास के 12 विद्यालयों के विलय के बाद यह संख्या बढ़कर लगभग 1600 हो गई है। वर्तमान में उपलब्ध बसों की संख्या विद्यार्थियों की जरूरत के अनुरूप नहीं है। इस संबंध में जिला प्रशासन को अवगत करा दिया गया है तथा अतिरिक्त बसों की मांग भेजी गई है। प्राचार्य के अनुसार परिवहन व्यवस्था के लिए टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को राहत मिल सकेगी।

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