शिवराज बोले- ‘तुमसे मिलने को जी करता है’, कैलाश ने कहा- ‘मेरे भी अच्छे दिन आ जाएं’, प्रहलाद पटेल बोले- ‘हमें भी मुक्ति मिले’
दतिया उपचुनाव के प्रचार के दौरान भाजपा के तीन वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल के बयानों को लेकर सियासी अटकलों का दौर तेज हो गया है। विपक्ष भी इन बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है, जबकि भाजपा इन्हें सामान्य और सहज टिप्पणी बता रही है।
शिवराज बोले- ‘तुमसे मिलने को जी करता है’
दतिया में आयोजित चुनावी सभा के दौरान जब समर्थकों ने “अगला मुख्यमंत्री, मामा हैं” के नारे लगाए तो शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें तुरंत रोक दिया। उन्होंने कहा कि उनका मन पूरी तरह संतोष से भरा हुआ है और ऐसे नारे नहीं लगाए जाएं।
सभा के दौरान उन्होंने समर्थकों से आत्मीय अंदाज में कहा, “बहुत दिनों से आपकी याद आ रही थी। क्या आपको भी मेरी याद आ रही थी? तुमसे मिलने को जी करता है।” उनके इस भावुक अंदाज को लोगों ने खूब सराहा, लेकिन मुख्यमंत्री वाले नारों पर उन्होंने संयम बरतने की सलाह दी।
कैलाश विजयवर्गीय का फिर छलका दर्द
इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से मजाकिया अंदाज में कहा, “इन दोनों का अच्छा समय चल रहा है। मैं इनके बीच बैठा हूं, हो सकता है मेरे भी अच्छे दिन आ जाएं।”
उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री को लिखे गए उनके पत्र में भी उपेक्षा का मुद्दा सामने आया था। ऐसे में उनके इस बयान को उसी संदर्भ से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि विजयवर्गीय ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में कही गई बात बताया।
प्रहलाद पटेल बोले- ‘हमें भी मुक्ति मिले’
दतिया उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद जब मंत्री प्रहलाद पटेल से पूछा गया कि क्या उन्हें भी टिकट कटने का डर है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “हम तो चाहते हैं कि हमें भी मुक्ति मिल जाए।”
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा में व्यक्ति पद के लिए नहीं, बल्कि संगठन और विचारधारा के लिए काम करता है। इसलिए टिकट मिले या न मिले, इससे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा
तीनों नेताओं के बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जहां शिवराज सिंह चौहान के बयान को समर्थकों के प्रति आत्मीयता से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं कैलाश विजयवर्गीय के बयान को उनकी राजनीतिक स्थिति से जोड़कर चर्चा हो रही है। दूसरी ओर प्रहलाद पटेल के बयान को पार्टी अनुशासन और संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।
दतिया उपचुनाव के बीच आए इन बयानों ने चुनावी माहौल को और अधिक रोचक बना दिया है और अब इन पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला भी जारी है।





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