भाजपा का कुनबा बड़ा होता ही लगी नेताओं की लाइन
भारतीय जनता पार्टी देश की सबसे बड़ी पार्टी है। कार्यकर्ताओं का बड़ा हुजूम भाजपा के पास मौजूद है। पन्ना प्रमुख से लेकर बड़े कार्यकर्ता मजबूती के लिए काम कर रहे हैं। आरएसएस का साथ हमेशा भाजपा को मिलता रहा है, इसमें कोई शक नहीं है। भाजपा के कुनबे के साथ विधानसभा में नेताओं की कतार दिखाई देने लगी है। एक-एक विधानसभा में 4 से 5 दावेदार अपनी ताकत दिखा रहे हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव को अभी दो साल बाकी हैं, लेकिन विधायक का सपना देख रहे नेता अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। छोटे-मोटे आयोजनों में लगातार पहुंचना, कार्यकर्ताओं से मिलना, यज्ञ, विवाह जैसे आयोजनों में शामिल होना शुरू हो गया है। यही हाल देपालपुर विधानसभा का भी है। यहां भी नेताओं की कतार लग गई है। कार्यकर्ताओं का हुजूम भाजपा के साथ है, लेकिन पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती नेताओं को एडजस्टमेंट करने में मिलेगी।
मनोज पटेल हैं, लेकिन इस सीट पर अब नजर पूर्व विधायक विशाल पटेल, भाजपा जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा, हिंदवादी नेता राजेंद्र चौधरी, पूर्व जिला अध्यक्ष चिंटू वर्मा और रवि राज सिंह जैसे नेताओं पर भी है। राजेंद्र चौधरी ने निर्दलीय चुनाव लड़कर अपनी ताकत पिछले विधानसभा चुनाव में दिखाई थी। युवाओं की लंबी फौज आज भी उनके साथ है। इसमें कोई शक नहीं कि पूर्व विधायक विशाल पटेल कांग्रेस से चुनाव लड़े, लेकिन पिछले चुनाव में उन्हें मनोज पटेल से हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने विशाल के मन को विचलित कर दिया और उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। उनके साथ कई कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल हो गए। हालांकि देपालपुर में भाजपा के अंदर गुटबाजी और बढ़ती चली गई। चिंटू वर्मा को कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा जिला अध्यक्ष बनाया था। वर्मा कैलाश गुट से आते हैं। 11 महीने भाजपा जिला अध्यक्ष रहने के बाद दूसरी बार जिला अध्यक्ष की नियुक्ति में ग्रामीण विधायकों के विरोध का सामना वर्मा को करना पड़ा। इसका फायदा वर्तमान जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा को मिला। पार्टी ने उन्हें जिला अध्यक्ष बना दिया। चावड़ा देपालपुर विधानसभा से आते हैं। देपालपुर में राजपूत समाज के 55 हजार से अधिक मतदाता हैं। चावड़ा युवा मोर्चा में जिला अध्यक्ष रहने के बाद से ही देपालपुर क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्हें भी लग रहा है कि नेताओं की आपसी खींचतान का मुझे फिर फायदा मिलेगा।
देपालपुर में करणी सेना की एंट्री हुई। रवि राज सिंह लगातार किसानों की लड़ाई लड़ते रहे हैं। हताई, किसानों के लिए धरना-प्रदर्शन भी किया। मुआवजे को लेकर रवि राज ने लंबी लड़ाई लड़ी। किसान हित के कारण उन्हें कलौता समाज का भी समर्थन मिल रहा है। वे राष्ट्रीय सेना नेशनल पार्टी या प्रोग्रेसिव फ्रंट (जैसा प्रकाशित) के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। भाजपा नेताओं के लिए देपालपुर अब आसान नहीं है। नेताओं को लगातार कार्यकर्ताओं के बीच देखा जा रहा है। लेकिन भाजपा में संगठन महत्वपूर्ण है। संगठन के आगे कोई नेता नहीं चलता। अब देखना होगा कि भाजपा अपने नेताओं को आने वाले समय में कैसे एडजस्टमेंट करती है।





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