भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में संगठन के पुनर्गठन के नाम पर भंग किए गए 60 से अधिक विभाग और प्रकोष्ठों में नई नियुक्तियां एक माह बाद भी अटक गई हैं। इन विभागों और प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हुई है और न ही नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। इसके कारण पार्टी के विभिन्न विभागों और प्रकोष्ठों की संगठनात्मक गतिविधियां फिलहाल ठप हैं।
कांग्रेस ने 5 अगस्त को प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर पर अपने सभी विभागों और प्रकोष्ठों की इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया था। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने यह आदेश जारी किया था। इसके पहले नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में मध्यप्रदेश के जिला कांग्रेस अध्यक्षों के साथ संगठन को लेकर बैठक हुई थी। पार्टी की ओर से उस समय कहा गया था कि संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और आगामी चुनावों को देखते हुए पुनर्गठन किया जा रहा है। 60 से अधिक विभाग और प्रकोष्ठों को भंग करने के बाद इनमें नए और सक्रिय नेताओं को जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई थी। लेकिन 37 दिन गुजरने के बाद भी नई नियुक्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कार्यकर्ताओं में बढ़ी बेचैनी, असमंजस की स्थिति
विभागों और प्रकोष्ठों में अध्यक्ष और कार्यकारिणी नहीं होने से इनसे जुड़े कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति है। कई नेता अपने-अपने विभाग में जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। पार्टी के अंदर संगठन के आकार को छोटा करने और सक्रिय नेताओं को जिम्मेदारी देने पर भी मंथन चल रहा है। अगस्त के अंतिम सप्ताह की रिपोर्टों में प्रदेश कांग्रेस की मौजूदा कार्यकारिणी में भी बदलाव और नई छोटी कार्यकारिणी बनाए जाने की संभावना जताई गई थी।




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