नई दिल्ली (एजेंसी)। कांग्रेस ने वंदे मातरम को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी 1937 में हुई कांग्रेस बैठक में लिए गए फैसले का पालन करेगी। इसके तहत पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल दो अंतरे गाए जाएंगे। नई दिल्ली के इंदिरा भवन में बुधवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई। इसमें ही वंदे मातरम पर कांग्रेस ने यह फैसला लिया। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि वंदे मातरम और राष्ट्रगान कांग्रेस के लिए भावनात्मक मुद्दे हैं, जबकि भाजपा के लिए ये राजनीतिक मुद्दे हैं।
गौरतलब है कि 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम पर कांग्रेसी नेताओं के व्यवहार को लेकर विवाद हो रहा है। भाजपा का आरोप है कि गीत के दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष ने गीत रुकवाने की कोशिश की थी। वंदे मातरम गाया जा रहा था, तभी सोनिया पीछे मुड़कर इशारा करती दिखीं। राहुल ने भी इशारे में कुछ पूछा। एक स्टाफ सदस्य पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पास पहुंचा। खड़गे ने उसके कान में कुछ कहा, फिर सोनिया ने भी उससे बात की।
विदित है कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत घोषित किया था। लंबे समय तक इसके अपमान पर कोई अलग कानून नहीं था, लेकिन 2026 के मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ बनाया। इस कानून के तहत ‘वंदे मातरम’ के गायन को जानबूझकर रोकने, इसमें बाधा डालने या इसका सार्वजनिक अपमान करने को दंडनीय अपराध माना गया है। ऐसा करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।
भाजपा अध्यक्ष ने 15 अगस्त को कांग्रेस कार्यालय में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर हुए विवाद का भी इशारों में जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब कुछ दिन पहले ‘एक व्यक्ति के आचरण’ में भी राष्ट्रगीत का यही अपमान दिखाई दिया था। तब कांग्रेस ने उसे ‘संयोग’ बताकर टाल दिया था। उन्होंने कहा, आज वही अपमान कांग्रेस की नीति बन चुका है।





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