भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने Gen-Z युवाओं को जोड़ने के लिए नया अभियान शुरू किया है। राहुल गांधी की रणनीति पर आधारित यह योजना छात्रों से संवाद और नए नेताओं की तलाश पर केंद्रित है। लेकिन संगठन की गुटबाजी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। लगातार चुनावी हार के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस अब अपनी रणनीति बदलती दिख रही है। पार्टी ने Gen-Z यानी युवा मतदाताओं पर बड़ा दांव लगाया है। राहुल गांधी के निर्देश के बाद प्रदेश में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान शुरू हो रहा है। मकसद सिर्फ छात्रों की समस्याएं सुनना नहीं, बल्कि भविष्य के नेता तैयार करना भी है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह नई रणनीति कांग्रेस की पुरानी गुटबाजी पर भारी पड़ पाएगी ?
पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के नतीजों ने एमपी कांग्रेस को साफ संकेत दिया कि युवा मतदाताओं के बीच उसकी पकड़ कमजोर हुई है। अब पार्टी मान रही है कि आने वाले चुनावों में वही दल आगे रहेगा जो युवाओं की भाषा और उनके मुद्दों को समझेगा। इसी सोच के साथ प्रदेश में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान शुरू किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के करीब 2.3 से 2.5 करोड़ युवा हैं। कांग्रेस का आकलन है कि आने वाले चुनावों में यही वर्ग सबसे निर्णायक साबित हो सकता है। यही वजह है कि पार्टी अभी से इस वर्ग के साथ राजनीतिक संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रही है। महिला कांग्रेस भी अलग अभियान चलाने की तैयारी में है।
सिर्फ आंदोलन नहीं, भविष्य की राजनीतिक तैयारी
कांग्रेस इस अभियान को केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और युवा समूहों के बीच पहुंचकर यह जानना चाहती है कि नई पीढ़ी किन मुद्दों पर सरकार और राजनीति को परख रही है। शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, महंगाई और करियर जैसे विषय अभियान के केंद्र में रहेंगे।






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