निगम चुनाव से एक साल पहले कांग्रेस में बड़ा बदलाव
इंदौर। नगर निगम चुनाव से करीब एक वर्ष पहले कांग्रेस ने नगर निगम परिषद में बड़ा राजनीतिक बदलाव करते हुए वार्ड-45 की पार्षद सोनिला मिमरोट को नया नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही अब तक यह जिम्मेदारी संभाल रहे चिंटू चौकसे को पद से हटा दिया गया है। कांग्रेस संगठन ने इस फैसले के पीछे ‘एक व्यक्ति-एक पद’ के सिद्धांत को प्रमुख कारण बताया है।
चौकसे वर्तमान में शहर कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं। लगभग दस महीने पहले उन्हें यह जिम्मेदारी मिली थी, जिसके बाद पार्टी के भीतर लगातार यह सवाल उठ रहा था कि संगठन और निगम में महत्वपूर्ण पद एक ही व्यक्ति के पास क्यों हैं। इसी बीच सामने आए एक ऑडियो विवाद और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी ने भी बदलाव की चर्चा को हवा दी थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा जारी आदेश में सोनिला मिमरोट को कांग्रेस पार्षद दल का नेता नियुक्त किया गया है। यह आदेश प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की सहमति से जारी हुआ।
नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
नई नियुक्ति के साथ प्रक्रिया को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के नियमों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष के चयन में पार्षद दल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन इस बार न तो पार्षद दल की बैठक बुलाई गई और न ही पार्षदों से औपचारिक रूप से राय मांगी गई। आदेश सीधे प्रदेश संगठन की ओर से जारी हुआ, जिससे यह तय नहीं हो पाया कि निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत लिया गया या संगठन स्तर पर किया गया। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार सोनिला मिमरोट का नाम संगठन और स्थानीय नेतृत्व दोनों की सहमति से तय हुआ। इससे पहले उन्हें शहर महिला कांग्रेस की जिम्मेदारी भी सौंपी जा चुकी है। माना जा रहा है कि आगामी नगर निगम चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने उन्हें नई राजनीतिक भूमिका देने का निर्णय लिया है।

वरिष्ठ दावेदारों को पीछे छोड़ मिली जिम्मेदारी
नेता प्रतिपक्ष बदलने की चर्चा लंबे समय से चल रही थी। इस पद की दौड़ में पूर्व नेता प्रतिपक्ष फौजिया शेख अलीम, तीन बार की पार्षद विनितिका यादव और चार बार की पार्षद रुबीना इकबाल खान के नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल बताए जा रहे थे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अनुभव को देखते हुए विनितिका यादव को मौका मिल सकता था, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने पहली बार पार्षद बनी सोनिला मिमरोट पर भरोसा जताया। पार्टी का यह निर्णय आने वाले नगर निगम चुनावों की रणनीति और महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।






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