आईटीएमएस ने खोला राज, दूसरे वाहन पर लगाया था फर्जी नंबर; चेकिंग के दौरान पुलिस ने आरोपी को पकड़ा
इंदौर संकेत प्रतिनिधि
इंदौर। शहर में यातायात नियमों की निगरानी के लिए लगाए गए आईटीएमएस (इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) ने नंबर प्लेट से जुड़े एक अनोखे फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। मामला सामने आने के बाद पुलिस भी हैरान रह गई, क्योंकि जिस वाहन के नंबर पर लगातार ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के चालान कट रहे थे, वह वाहन उस समय किसी दूसरी जगह खड़ा था। वाहन मालिक को एक के बाद एक चालान मिलने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि कोई दूसरा व्यक्ति उनके वाहन का नंबर अपनी कार पर लगाकर शहर में घूम रहा था।
लगातार पहुंच रहे थे चालान
मामला सोनू परमार की एटिंगा गाड़ी से जुड़ा है। सोनू के पास लगातार ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से संबंधित चालान पहुंच रहे थे। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य गलती माना, लेकिन जब बार-बार उनके वाहन के नंबर पर चालान आने लगे तो उन्हें संदेह हुआ।
सोनू ने पुलिस को बताया कि जिस समय चालान में वाहन के शहर में घूमने या यातायात नियम तोड़ने की जानकारी सामने आ रही थी, उस समय उनकी गाड़ी किसी अन्य स्थान पर खड़ी थी। ऐसे में उनके वाहन के नंबर पर चालान कैसे कट रहे हैं, यह समझ से बाहर था।
पुलिस को हुआ फर्जी नंबर प्लेट का शक
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह आशंका सामने आई कि किसी अन्य वाहन पर सोनू की गाड़ी का नंबर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बाद यातायात पुलिस के विभिन्न पॉइंट्स को अलर्ट किया गया और संबंधित नंबर की गाड़ी पर नजर रखने के निर्देश दिए गए। आईटीएमएस में दर्ज तस्वीरों और जानकारी के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध वाहन की तलाश शुरू की। इसी दौरान देवगुराड़िया से तीन इमली के बीच पुलिस द्वारा की जा रही चेकिंग के दौरान इसी नंबर की एक दूसरी गाड़ी दिखाई दी।
चेकिंग में पकड़ी गई फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ी
पुलिस ने वाहन को रोककर जांच की तो नंबर प्लेट वही थी, जिस नंबर पर सोनू परमार के वाहन के चालान कट रहे थे। जांच के दौरान वाहन चालक की पहचान दिनेश कुशवाह, निवासी सोनकच्छ, जिला देवास के रूप में हुई। दिनेश पेशे से ड्राइवर बताया गया है। पुलिस ने जब वाहन के दस्तावेज और नंबर प्लेट की जांच की तो मामला और स्पष्ट हो गया। पूछताछ में सामने आया कि दिनेश अपनी गाड़ी पर अलग-अलग नंबर प्लेटों का इस्तेमाल कर रहा था। इनमें से एक नंबर सोनू परमार के वाहन का भी था।
अलग-अलग नंबर प्लेट लगाकर करता था वाहन का इस्तेमाल
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि आरोपी अपनी गाड़ी की पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग नंबर प्लेटों का इस्तेमाल करता था। इसी वजह से आईटीएमएस कैमरों में उसकी गाड़ी दूसरे वाहन के नंबर के साथ रिकॉर्ड हो रही थी और वास्तविक वाहन मालिक के नाम पर चालान जारी हो रहे थे। इस फर्जीवाड़े के कारण सोनू परमार को बिना किसी गलती के लगातार चालानों का सामना करना पड़ रहा था। शिकायत के बाद आईटीएमएस रिकॉर्ड और सड़क पर लगे कैमरों की मदद से पुलिस ने मामले की कड़ी जोड़ते हुए फर्जी नंबर प्लेट इस्तेमाल करने वाले वाहन को पकड़ लिया।
आईटीएमएस से खुला पूरा मामला
इस पूरे मामले में आईटीएमएस की भूमिका अहम रही। कैमरों में रिकॉर्ड वाहन और नंबर प्लेट की जानकारी के आधार पर पुलिस को संदिग्ध वाहन की पहचान करने में मदद मिली। यदि वाहन मालिक चालान को लेकर शिकायत नहीं करते तो संभव है कि लंबे समय तक उनके नाम पर ही चालान जारी होते रहते। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने कितने समय से फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया था और उसके वाहन पर किन-किन नंबर प्लेटों का उपयोग किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे उसका उद्देश्य क्या था और फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल कर उसने कोई अन्य यातायात या आपराधिक गतिविधि तो नहीं की।
नंबर प्लेट की इस तरह की हेराफेरी न केवल वाहन मालिक के लिए परेशानी का कारण बनती है, बल्कि इससे यातायात निगरानी व्यवस्था को भी गुमराह किया जा सकता है। इस मामले ने यह भी दिखाया है कि आईटीएमएस के माध्यम से दर्ज होने वाली तस्वीरों और वाहन की वास्तविक पहचान का मिलान कितना महत्वपूर्ण है।






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