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तीन माह से प्रदेश के हॉस्टलों को नहीं मिला बजट, अब नए पोर्टल का इंतजार

पीएफएमएस नहीं, स्पर्श पोर्टल के माध्यम से मिलेगी छात्रावासों को राशि, राशि नहीं मिलने से प्रदेश के 600 से ज्यादा छात्रावासों की व्यवस्थाएं गड़बड़ाई

इंदौर संकेत प्रतिनिधि

भोपाल। छात्रावासों के संचालन में वित्तीय व्यवस्थाओं की पारदर्शिता बनाने के लिए अब सिस्टम में नवीन पोर्टल तैयार किया जाएगा। हॉस्टलों के काम में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह पोर्टल तैयार किया जा रहा है। इस वजह से प्रदेश में आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। कई हॉस्टलों पर बाजार की उधारी हो गई है। सरकार से राशि जारी होने पर ही वे इसे चुका सकेंगे। राजधानी सहित पूरे प्रदेश में हॉस्टलों को तीन माह से राशि की प्रतीक्षा है। दूसरी ओर विभाग में सिस्टम सुधार पर जोर दिया जा रहा है। अब जब तक नया पोर्टल तैयार नहीं होगा तब तक यह राशि जारी नहीं हो पाएगी।

अभी तक पीएमएफएस पोर्टल के माध्यम से हॉस्टलों को राशि जारी होती रही है। इसमें इसमें भारत सरकार और मध्य प्रदेश के अंशदान का बजट पहले राज्य शिक्षा केंद्र को दे दिया जाता था। इसके बाद यहां से यह बजट जिलों को भेजा जाता था। इसमें अनेक प्रकार की अनियमितताएं भी सामने आती रही। यह राशि जारी होने में कई प्रकार के आरोप भी लगते रहे हैं। नतीजतन व्यवस्था में पूरी तरह से पारदर्शिता लाने के लिए नया सिस्टम लॉन्च हो रहा है। अब इसके लिए एसएमएस स्पर्श पोर्टल तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अब इस पोर्टल से सीधे दोनों अंशदानों की राशि जारी की जाएगी। यह राशि डायरेक्ट छात्रावास के खाते में पहुंचेगी। पोर्टल पर हॉस्टलों में जितने ऑनलाइन बच्चे दर्ज हैं उतने ही बच्चों के अनुपात में सालाना की राशि जारी कर दी जाएगी। अफसरों का दावा है कि इससे हॉस्टलों में राशि का सही तरीके से वितरण हो सकेगा।

आर्थिक संकट में छात्रावास, यह रही उधारी

नए सिस्टम तैयार होने में विलंब के कारण छात्रावासों में आर्थिक संकट खड़ा हुआ है। छात्रावासों में वार्डन का कहना है कि पिछले तीन महीने से राशि जारी नहीं हुई है। इस कारण बाजारों में उधारी बढ़ गई है, क्योंकि प्रतिदिन के हिसाब से रोजाना दोनों टाइम के भोजन और नाश्ते के लिए यह सामग्री बाजार से खरीदी जाती है। भोजन की सामग्री में आटा, दाल, चावल, सब्जी, सहित अन्य खाद्य सामग्री जुटाना पड़ रही है। पहले नियम से खरीदी का भुगतान होता था। लेकिन नए सिस्टम शुरुआत जारी नहीं हो पायी है। जिससे परेशानियां बढ़ रही हैं। हालांकि राज्य शिक्षा केंद्र का कहना है कि जल्द ही यह व्यवस्था शुरू की जाएगी।

कई मदों की राशि इसमें रहेगी शामिल

शिक्षा विभाग द्वारा जो व्यवस्था बनाई जा रही है उसके तहत इसमें कई मदों की राशि शामिल होगी। बच्चों की आवास व्यवस्था से लेकर भोजन, शिक्षण सामग्री, मेंटेनेंस टेबल कुर्सियां सहित अन्य मद शामिल किए गए हैं। इसकी निगरानी भी जिलों में डीपीसी करेंगे।

660 छात्रावासों का हो रहा है संचालन

राजधानी सहित पूरे प्रदेश में 660 छात्रावासों का संचालन हो रहा है। इनमें सवा सौ बालक छात्रावास जबकि अन्य छात्रावास बालिका के चलाए जा रहे हैं। इन छात्रावासों को स्कूलों के परिसरों में ही संचालित किया जा रहा है। जहां से बच्चों की आवास व्यवस्था और उनकी पढ़ाई के प्रबंध किए गए हैं।

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