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मोदी सरकार के लिखित वादे से पिघला डीएमके का दिल?

नई दिल्ली (एजेंसी)। लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और 2029 से महिला आरक्षण कानून लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर मोदी सरकार के लिए राहत भरी खबर विपक्ष के अहम सहयोगी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) से आई है। इस मुद्दे पर अपने पिछले रुख से पीछे हटते दिख रहे हैं। बंगाल चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बगावत और शिवसेना (यूबीटी) में टूट के बाद सरकार के पक्ष में सियासी माहौल मजबूत होता नजर आ रहा है।

पिछले सत्र में इस बिल पर चर्चा के दौरान सरकार ने खुले तौर पर यह भरोसा दिलाने की कोशिश की थी कि लोकसभा में सभी राज्यों के प्रतिनिधित्व में 50% की वृद्धि की जाएगी। गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले साल भी इसे सार्वजनिक रूप से कहा था। माना जा रहा है कि सरकार अब उस वादे को बिल के ड्राफ्ट में लिखित रूप से शामिल कर सकती है, ताकि दक्षिण के दलों को भरोसा दिलाया जा सके। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के पास 8 सांसद हैं और उनका रुख बदलने से केंद्र सरकार को इस बिल पर अपना स्टैंड बदलने के संकेत मिल सकते हैं। इसके साथ ही राज्यसभा में भी सरकार के लिए संख्या बल काफी सकारात्मक नजर आ रहा है।

आगे क्या है सरकार की रणनीति?

सरकार ने फिलहाल इस बिल को दोबारा लाने की कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। हालांकि, शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सदन में जरूरी संख्या बल सुनिश्चित होते ही इसे फिर से पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि अप्रैल में इस बिल को 298 सांसदों का समर्थन हासिल हुआ था।

डीएमके ने कांग्रेस को याद दिलाया ‘धोखा’

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया गठबंधन के फैसले के खिलाफ जाने पर जब कांग्रेस ने अपने रुख को नरम करने की कोशिश की, तब डीएमके के सूत्रों ने कांग्रेस पर ही गठबंधन धर्म तोड़ने का आरोप लगाया। डीएमके के एक सूत्र ने कहा, “कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन को बर्बाद किया है। उन्होंने हमारे समर्थन से विधानसभा में पांच सीटें जीतने के बाद विजय के नेतृत्व वाली टीवीके पार्टी के साथ गठबंधन करके डीएमके को धोखा दिया।”

इसलिए उन्हें हमें उपदेश देना बंद कर देना चाहिए। डीएमके ने साफ किया है कि भले ही वह अपनी चिंताओं को दूर करने वाली परिसीमन योजना का समर्थन करने को तैयार है, लेकिन वह पिछली बार की तरह आंख मूंदकर भाजपा के साथ नहीं चलेगी। पार्टी सूत्रों ने 1997 का जिक्र करते हुए कहा, “कांग्रेस का इतिहास अपने सहयोगियों को धोखा देने का रहा है। उसने पूर्व पीएम राजीव गांधी के हत्यारों से मिलीभगत का बेबुनियाद आरोप लगाकर आईके गुजराल सरकार से समर्थन वापस लिया था। इससे संयुक्त मोर्चा की सरकार गिर गई थी।”

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