नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्र सरकार के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दिल्ली का सियासी पारा बढ़ा हुआ है। कौन मंत्री बनेगा, किसका विभाग बदलेगा और किसे संगठन की जिम्मेदारी मिलेगी—इन सवालों के बीच सत्ता के गलियारों में एक नई चर्चा ने राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बढ़ा दी है।
चर्चा यह है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सरकार में उपप्रधानमंत्री की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में न तो सरकार की ओर से और न ही सत्तारूढ़ दल की ओर से कोई आधिकारिक संकेत मिला है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे संभावित ‘मास्टर स्ट्रोक’ के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में अमित शाह ने सरकार और संगठन दोनों में अत्यंत प्रभावशाली भूमिका निभाई है। जम्मू-कश्मीर से जुड़े फैसले, आंतरिक सुरक्षा, सहकारिता मंत्रालय और चुनावी रणनीति जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें सरकार के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल किया है।
यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच उनका नाम उपप्रधानमंत्री पद के लिए सामने आने लगा है। यदि ऐसा होता है तो इसे केवल पदोन्नति नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की भविष्य की राजनीतिक और प्रशासनिक दिशा का संकेत भी माना जाएगा।

सियासी जानकारों का यह भी कहना है कि आगामी विधानसभा चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति के बदलते समीकरणों को देखते हुए सरकार कुछ बड़े प्रतीकात्मक और राजनीतिक फैसले ले सकती है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार केवल नए चेहरों को शामिल करने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक रणनीति का माध्यम भी बन सकता है।
राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि प्रधानमंत्री सरकार को नया राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश देना चाहते हैं, तो इस बार सबसे बड़ा फैसला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रूप में सामने आ सकता है। हालांकि, फिलहाल इस चर्चा की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन सत्ता के गलियारों में इसे लेकर फुसफुसाहट लगातार तेज होती जा रही है।






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