इंदौर। इंदौर लोकायुक्त ने अब एक और हाईप्रोफाइल मामले में आरोपी को क्लीन चिट दे दी है। यह आरोपी है तत्कालीन वन एसडीओ राजनारायण सक्सेना। इनकी जांच करने के बाद लोकायुक्त ने पाया कि भ्रष्टाचार कर खूब कमाई की। छापा मारा और अब क्लीन चिट दे दी।
आय से अधिक कमाई के मामले में लोकायुक्त इंदौर की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। रिटायर्ड आईएफएस संजय चौधरी को आय से अधिक संपत्ति मामले में पहले ही क्लीन चिट मिल चुकी है। अब इसी मामले में लोकायुक्त ने वन विभाग के तत्कालीन एसडीओ राजनारायण सक्सेना को भी क्लीन चिट दे दी है। इस तरह जांच में दोनों अधिकारियों को राहत मिल गई है। जबकि लोकायुक्त ने इंदौर में दिसंबर 2018 में सक्सेना पर छापा मारा था। इस दौरान उन पर कई खुले और भ्रष्ट कमाई का भी उल्लेख किया गया था। यह वही सक्सेना हैं जो मार्च 2018 में शहर में घूम रहे तेंदुए को पकड़ने के दौरान हमले में घायल हुए थे।
सक्सेना पर छापे में क्या हुआ था
सक्सेना के खिलाफ यूएस वर्मा हाईकोर्ट अधिवक्ता ने जून 2018 में शिकायत की थी। इसमें बताया गया था कि वह 13 साल से इंदौर में पदस्थ थे और भ्रष्टाचार के जरिए करोड़ों कमा चुके हैं। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने इसकी जांच कराई। फिर 6 माह की जांच के बाद इसे सही पाया गया। इसके बाद सक्सेना पर दिसंबर 2018 में आय से अधिक कमाई को लेकर भ्रष्टाचार की धाराओं में केस हुआ। लोकायुक्त ने सक्सेना के निवास पर छापा मारा था। साथ ही पांच जगह एक साथ लोकायुक्त टीम ने दबिश दी थी। तब लोकायुक्त एसपी दिलीप सोनी थे। छापा डीएसपी प्रवीण बघेल की टीम ने मारा था।

लोकायुक्त ने छापे के बाद यह बताया
जांच में पाया कि सर्वानंद नगर और भोलाराम उस्ताद मार्ग पर सक्सेना के दो हॉस्टल हैं। छापे में 5 लाख नकद, हॉस्टल के पेपर, 7 प्लॉट के दस्तावेज, सांवेर रोड पर आदित्य वुड फैक्ट्री नाम से फैक्ट्री, आधा किलो सोना, 5 किलो चांदी के जेवरात, 13 बैंक खाते, डायमंड की अंगूठियां समेत कई महंगी वस्तुएं भी मिली थीं।






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