पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए समझौते के बाद जहां होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल होने की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र की स्थिति को फिर से संवेदनशील बना दिया है। ताजा घटनाक्रम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को लेकर नई चिंताएं सामने आने लगी हैं।
जानकारी के अनुसार, लेबनान में इजरायली हमलों के जारी रहने से ईरान ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। ईरान समर्थित संगठनों और अधिकारियों का कहना है कि जब तक क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बंद नहीं होती और पहले हुए समझौतों की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं किया जाता, तब तक हालात सामान्य नहीं माने जा सकते। इसी कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में शामिल इस समुद्री रास्ते पर किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य केवल ईरान और अमेरिका के बीच विवाद का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे पश्चिम एशिया की सामरिक और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा हुआ मुद्दा है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
उधर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए रखी है। कई देशों ने अपने व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। वहीं ईरान का कहना है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा और अपने राष्ट्रीय हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। दूसरी ओर इजरायल ने भी अपनी कार्रवाई को सुरक्षा आवश्यकताओं से जुड़ा कदम बताया है।
राजनयिक स्तर पर तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन लेबनान में जारी घटनाक्रम और ईरान-इजरायल के बीच बढ़ती बयानबाजी ने पश्चिम एशिया में स्थिरता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल दुनिया की नजरें होर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान की स्थिति पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यहां होने वाला कोई भी बड़ा घटनाक्रम वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।





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