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कॉलोनी विकास के नियमों में बड़ा बदलाव, 75 दिन बाद स्वतः मिलेगी मंजूरी; पंचायतों की भूमिका खत्म

ग्रामीण क्षेत्रों में कलेक्टर और शहरों में एसडीएम होंगे जिम्मेदार, खरीदार ऑनलाइन जांच सकेंगे कॉलोनी की स्थिति

भोपाल। प्रदेश में कॉलोनी विकास और अनुमति प्रक्रिया को पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के लिए सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत अब शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलोनी विकास के लिए अलग-अलग नियम नहीं होंगे। सरकार एक समान नीति लागू करने की तैयारी में है, जिससे कॉलोनाइजरों और आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

नए मसौदे के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलोनी विकास संबंधी अनुमतियों का अधिकार कलेक्टर के पास होगा, जबकि नगरीय क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी एसडीएम को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों की भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी और कॉलोनी विकास से जुड़े निर्णय प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर पर लिए जाएंगे।

75 दिन बाद स्वतः मिल जाएगी अनुमति

नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता “डीम्ड अप्रूवल” यानी स्वतः स्वीकृति का प्रावधान है। यदि कोई कॉलोनाइजर कॉलोनी विकसित करने के लिए आवेदन करता है और संबंधित अधिकारी 60 दिनों के भीतर उस पर निर्णय नहीं लेते हैं, तो आवेदक नोटिस जारी कर सकेगा। नोटिस देने के 15 दिन बाद भी यदि कोई फैसला नहीं होता है, तो अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जाएगी।

इस प्रकार आवेदन के कुल 75 दिन बाद कॉलोनाइजर को अनुमति मिल जाएगी, जिससे फाइलों के लंबे समय तक लंबित रहने की समस्या समाप्त हो सकेगी।

कॉलोनाइजरों की होगी ऑनलाइन मॉनिटरिंग

सरकार कॉलोनी विकास प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने जा रही है। प्रत्येक कॉलोनाइजर का एक डिजिटल प्रोफाइल तैयार किया जाएगा, जिसमें उसकी सभी परियोजनाओं, अनुमतियों, विकास कार्यों और संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। यह जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।

खरीदार भी कर सकेंगे ऑनलाइन जांच

नई व्यवस्था में कॉलोनी में प्लॉट या मकान खरीदने वाले नागरिकों को भी बड़ा फायदा मिलेगा। वे ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से यह जांच सकेंगे कि संबंधित कॉलोनी को वैध अनुमति मिली है या नहीं तथा वहां विकास कार्यों की क्या स्थिति है। इससे अवैध कॉलोनियों और फर्जी परियोजनाओं में निवेश के जोखिम को कम किया जा सकेगा।

अधूरे विकास कार्यों पर सख्ती

यदि किसी कॉलोनी में सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति, सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास अधूरा रह जाता है, तो प्रशासन को हस्तक्षेप का अधिकार होगा। ऐसी स्थिति में बंधक रखी गई संपत्तियों का उपयोग कर शेष विकास कार्य पूरे कराए जा सकेंगे।

ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के लिए 15% क्षेत्र आरक्षित

सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए भी विशेष प्रावधान किया है। नई कॉलोनियों में कुल क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत हिस्सा इन वर्गों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इससे किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलेगी।

मुख्य बिंदु

• शहर और गांव की कॉलोनियों के लिए एक समान नियम लागू होंगे।
• ग्राम पंचायतों की भूमिका समाप्त होगी।
• ग्रामीण क्षेत्रों में कलेक्टर और शहरों में एसडीएम होंगे जिम्मेदार अधिकारी।
• 60 दिन में फैसला नहीं होने पर नोटिस दिया जा सकेगा।
• नोटिस के 15 दिन बाद स्वतः मंजूरी (डीम्ड अप्रूवल) मिल जाएगी।
• कॉलोनाइजरों का डिजिटल प्रोफाइल तैयार होगा।
• खरीदार ऑनलाइन कॉलोनी की वैधता और विकास कार्यों की जांच कर सकेंगे।
• अधूरे विकास कार्य प्रशासन बंधक संपत्तियों से पूरे करा सकेगा।
• EWS और LIG वर्ग के लिए 15% क्षेत्र आरक्षित रहेगा।

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