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सांदीपनी स्कूलों पर शोर, हकीकत में नतीजे कमजोर

खरे नहीं उतरे शतप्रतिशत रिजल्ट लाने वाले स्कूलों में सर्वसुविधा युक्त सांदीपनी स्कूल पिछड़े

मध्यप्रदेश में सांदीपनी स्कूलों को लेकर इन दिनों जिस तरह का हल्ला मचाया जा रहा है, वह जमीनी हकीकत से काफी अलग नजर आ रहा है। बेहतर शिक्षकों की उपलब्धता और निजी स्कूलों जैसी सुविधाओं का दावा करने वाले इन स्कूलों के परीक्षा परिणाम अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। इंदौर जिले के हालिया बोर्ड परीक्षा परिणामों पर नजर डालें तो स्थिति और भी चौंकाने वाली है। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और बुनियादी सुविधाएं भी पूरी नहीं हैं, वहां शत-प्रतिशत परिणाम दर्ज किए गए हैं। इसके उलट सांदीपनी स्कूल, जिन्हें मॉडल स्कूल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, वहां प्रदर्शन औसत ही रहा। बारहवीं कक्षा की बात करें तो पूरे जिले में केवल एक ही स्कूल ऐसा रहा जहां 100 प्रतिशत परिणाम आया। वहीं हाई स्कूल (दसवीं) में केवल दो स्कूल ऐसे रहे, जो शत-प्रतिशत परिणाम हासिल कर पाया हो। यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि केवल संसाधन और ढांचा बेहतर होने से ही शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती। इंदौर जिले के बोर्ड परिणामों ने इस दावे की पोल खोल दी है। जिन स्कूलों में शिक्षक पूरे नहीं हैं, जहां संसाधनों का अभाव है, वही स्कूल शत-प्रतिशत परिणाम देकर व्यवस्था को आईना दिखा

प्रिसिपलों का अफसरशाही रवैया

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इंदौर जिले में सांदीपनी स्कूलों के प्रिंसिपलों का रवैया भी अब चर्चा का विषय बनता जा रहा है। आरोप है कि कई प्रिंसिपल खुद को जिला शिक्षा अधिकारी से कम नहीं समझते। हालात यह हैं कि जिले के अधिकारी और यहां तक कि जनप्रतिनिधियों को भी यह प्राचार्य खास महत्व नहीं देते। सूत्रों के अनुसार इन स्कूलों में प्रिंसिपलों का अपने ही अधिनस्थों के साथ सामंजस्य नहीं बैठ पा रहा है। अपने अडिग रवैये के चलते ये अपने स्टाफ के साथ शैक्षणिक गतिविधियों को नैपथ्य में रखकर अपने स्वयं के नियमों के आधार पर इन स्कूलों को संचालित कर रहे हैं। नतीजतन परिणाम बता रहे हैं कि शासन की मंशा में कोई कमी नहीं, लेकिन इन विद्यालयों के प्रिंसिपलों का अफसरशाही रवैया शासन की मेहनत पर पानी फेरता नजर आ रहा है। कुछ प्रिंसिपल अपने आप को सीधे उच्च स्तर यहां तक कि डीपीआई से जुड़ा बताकर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

10वीं-12वीं में 25 सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 100%: इसमें 10वीं में 17 और 12वीं में 8 स्कूलों का रिजल्ट शत-प्रतिशत रहा था

माध्यमिक शिक्षा मंडल के 10वीं और 12वीं कक्षा के रिजल्ट घोषित होने के बाद अब जिले के सभी शासकीय स्कूलों के रिजल्ट की समीक्षा की जा रही है। इस वर्ष 10वीं कक्षा में 17 स्कूलों का रिजल्ट 100 फीसदी रहा। वहीं 12वीं कक्षा में इस वर्ष 8 स्कूलों का रिजल्ट 100 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले वर्ष 5 स्कूलों ने शत-प्रतिशत रिजल्ट दिया था। कक्षा 12वीं में 17 स्कूल ऐसे रहे हैं, जिनका रिजल्ट 50 प्रतिशत से कम रहा, वहीं कक्षा 10वीं में 23 स्कूल ऐसे रहे हैं, जिनका रिजल्ट प्रतिशत 50 फीसदी से कम रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि इसमें दो सांदीपनी स्कूल भी शामिल है। वहीं कम प्रतिशत वाले स्कूलों की बात की जाए तो शासकीय उत्कृष्ट देपालपुर ऐसा स्कूल रहा है, जहां कक्षा 10वीं और 12वीं दोनों का ही रिजल्ट 50 प्रतिशत से कम रहा है। कक्षा 10वीं में सबसे कम प्रतिशत शासकीय उर्दू बक्षीबाग का रहा, जहां केवल 29.41 प्रतिशत बच्चे पास रहे। वहीं हायर सेकेंडरी में शा.उ.मा.वि. विवेकानंद का रिजल्ट सबसे कम रहा, जहां केवल 20.27 प्रतिशत बच्चे पास हुए।

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